राजनीती राज्यों से व्यक्तित्व

खुलासा : कुमार विश्वास का सहयोग न मिलने से बौखला गए हैं अरविन्द केजरीवाल !

आम  आदमी पार्टी की रैलियों में कुमार विश्वास के जादुई करिश्मे का गायब हो जाना अरविन्द केजरीवाल के लिए मुसीबत बना हुआ है, जब से अरविन्द केजरीवाल ने मोदी सरकार की नोटबन्दी की खिलाफत की, उस दिन के बाद कुमार विश्वास ने केजरीवाल की राजनीतिक रैलियों और सभाओं से कनि काट ली.

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दूसरी सबसे बड़ी बात ये है की कुमार विश्वास केजरीवाल की दलित और धर्म परस्त राजनीति करने के खिलाफ हैं, जान बूझ के हिन्दू समुदाय को खण्डित करने की राजनीती से कुमार विश्वास आहत हैं. इस बार ईद और मुस्लिम सभाओं में केजरीवाल ने कुमार विश्वास को न्योता दिया पर कुमार विश्वास ने व्यस्तता का बहाना बना के मुस्लिम परस्त राजनीति स्वीकारने से परहेज़ किया. अरविन्द केजरीवाल का सबसे बड़ा भय ये है की कहीं कुमार विश्वास BJP में न चले जाएं क्योंकि कुमार विश्वास कई बार मोदी की बेबाक तारीफ कर चुके हैं और उनसे प्रभावित भी रहे हैं. 

गौरतलब है भ्र्ष्टाचार आंदोलन और इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मुहीम के समय से केजरीवाल की सत्त्ता तक पहुँचने तक कुमार विश्वास उनके साथ एक मज़बूत स्तम्भ बन के चलते आये हैं, परन्तु केजरीवाल का कुमार विश्वास को सिर्फ राजनीतिक इस्तेमाल करना काफी लोगों को समझ आ चुका है. केजरीवाल के बाद आम आदमी पार्टी में कोई धुंआधार कद्दावर नाम था वो वो कुमार विश्वास का था, कुमार विश्वास एक प्रखर चिंतक, प्रवक्ता और कवी हैं, उनकी बहुत बड़ी फैन फोल्लोविंग भी है. परन्तु केजरीवाल ने जिस तरीके से कुमार विश्वास को मोहरा बना के अपनी राजनीती सिद्ध की, उससे कुमार विश्वास धीरे धीरे केजरीवाल से कन्नी काटते चलते गए.

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केजरीवाल में भी इंदिरा गाँधी वाले गन पनप चुके हैं, अपने से ज़्यादा समझदार और राजनीतिक प्रतिद्वंदी को कैसे इंदिरा गांधी साफ़ कर देती थी, केजरीवाल की हरकतों से साफ ज़ाहिर है. केजरीवाल ने जानबूझ कर कुमार विश्वास को लोकसभह में अमेटी सीट पर राहुल गाँधी के सामने चुनावी प्रतिद्वंदी बनवाया क्योंकि केजरीवाल जानते थे की कुमार विश्वास राहुल गाँधी से नहीं जीत पाएंगे. गौरतलब है कुमार विश्वास दिल्ली विधानसभा से राज्य सभा में मनोनीत होने वाले सबसे ज़्यादा उपयुक्त और प्रबल दावेदार हैं, परन्तु केजरीवाल कुमार विश्वास को राज्य सभा में पहुंचाने में भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे, न ही उसकी औपचारिक घोषणा की न ही कुमार विश्वास को आश्वस्त किया गया.

Kumar Vishwas Likely to Join BJP. Kejriwal Upset

कुमार विश्वास भीड़ जुटाने में माहिर हैं, अपने लाजवाब डायलॉग्स और कवी हृदय वाली पंक्तियों से वो विरोधियों को भी हसँते हंसते चुप करवा देते हैं. नोटबन्दी में कुमार विश्वास केजरीवाल की विरोधी राजनीती के पक्षधर नहीं, इसलिए आजकल चुनावी सभाओं और राजनीतिक भाषणबाज़ी से आजकल कुमार विश्वास परहेज़ कर रहे हैं.

नोटबन्दी के बाद एक तो आम आदमी पार्टी की हालात वैसे ही पतली हो चुकी है, दूसरा पार्टी के खाते में भी कोई चन्दा नहीं दे रहा, दूसरा कुमार विश्वास का खुले मन से केजरीवाल के साथ न चलना आम आदमी पार्टी और अरविन्द केजरीवाल दोनों के लिए मुसीबत  बन चुका है. अगर पंजाब में अरविन्द सीटें नहीं निकाल  पाए तो उनकी स्वयं की पार्टी में पकड़ ढीली हो जायेगी और पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ेगा !

कुमार विश्वास ने अपना जन्मदिवस भी अरविन्द केजरीवाल की गैर मौजूदगी में मनाया था, जिससे दोनों के बीच सम्बन्धो की खटास को जग जाहिर कर दिया था. खैर कुमार विश्वास तो ठहरे कवी, वो तो अपना कोई न कोई जरिया निकाल के लोगों के बीच अपनी जगह बनाये रखेंगे, परन्तु केजरीवाल को कुमार विश्वास के बिना आगे की राजनीतिक चढ़ाई पूरी करनी भारी मालूम पड़ेगी !

 

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