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कब मनाई जाए जन्माष्टमी ? इस दुविधा का निवारण समझने के लिए देखे ये पोस्ट !

janamashtmi upayas

हिमाचल के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य सतीश शर्मा इस दुविधा का निवारण करते हुए बता रहे हैं ! उनसे जुड़ने का पेज है !

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हर साल की तरह इस बार भी यह दुविधा हो गई है कि जन्माष्टमी 2 सितंबर को है या तीन सितंबर को। आइए जानते हैं यह व्रत किस दिन है और ज्यादातर लोग इसे कब मनाएंगे। भगवान कृष्ण के पावन धाम वृंदावन में इस बार धूमधाम से मनाए जाने की तैयारियों जोर-शोर से चल रही है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हर साल रक्षा बंधन के बाद मनाई जाती है। एक बात यहां समझने की है कि हिंदू धर्म में दो तरह की तिथि को लोग मानते है कुछ लोग उदया तिथी को मानते है और उसके अनुसार व्रत करते हैं। दूसरी तरफ कुछ लोग उदया तिथि को नहीं मानते हैं।

कब मनाई जाती है जन्माष्टमी?

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनार्इ जाती है। इस बार यह पर्व 2 सितंबर को पड़ रहा है। लेकिन इस बार भी कई लोग इसे 2 सितंबर और 3 सितंबर को अलग-अलग मनाएंगे। व्रत वाले दिन, स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद, पूरे दिन उपवास रखकर रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि पर व्रत का पारण किया जाता है।

कुछ लोग ग्राहस्थ धर्म में रहते हैं और कुछ साधु संन्यासी होते हैं, उन दोनों के व्रत अलग-अलग हो जाते हैं। स्मार्त यानी ग्राहस्थ धर्म में रहनेवाले लोग जो ग्रहस्थी के धर्म का पालन करते हैं। वैष्णव यानी वैष्णव सम्प्रदाय को माननेवाले लोग। ज्योतिषी और पंडितों के मुताबिक जन्माष्टमी का व्रत इस बार भी दो दिनों का है।

दो दिनों का यह व्रत स्मार्त और वैष्णवों के लिए बांटा गया है। इस बार 2 सितंबर का दिन जन्माष्टमी स्मार्त लोगों के लिए होगा यानी इस दिन ग्राहस्थ लोग रविवार को जन्माष्टमी का व्रत रख सकते हैं और रात 12 बजे जन्मोत्सव मनाएंगे। साथ ही सोमवार यानी 3 सितंबर को जन्माष्टमी वैष्णव लोग मनाएंगे। दरअसल वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव की धूम दो दिन पहले से ही रहती है।

क्या है जन्माष्टमी का मुहूर्त?

इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व 2 सितम्बर रविवार को पड़ रहा है। भारतीय समयानुसार रविवार रात्रि को 08 बजकर 49 मिनट से लेकर अगले दिन सोमवार शाम 07 बजकर 23 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। रविवार को ही रोहिणी नक्षत्र रात्रि 08 बजकर 49 मिनट से लेकर सोमवार को रात्रि 08 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। गौर हो कि भगवान कृष्ण जी का जन्म रात में 12 बजे वृष लग्न में ही हुआ था। इस दिन तिथि अष्टमी और नक्षत्र रोहिणी के संयोग होने से यह (श्रीकृष्ण जयन्ती) योग बना है। लिहाजा इस बार की पूजा शुभातिशुभ योग और लाभ देनेवाली है। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस दिन व्रत और पूजन यकीनन सभी मनोरथों को पूर्ण करनेवाला है।

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