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ब्रेकिंग : चुनाव शुरू होने से पहले ही MP में कांग्रेस की लुटिया डूबी, सिंधिया और कमल नाथ एक दूसरे के प्रत्याशियों को काटने में जुटे

Congress Loses Battle Before Poll

वैसे तो आजकल सिंधिया राहुल गाँधी के साथ गली गली मंदिर मंदिर खुद को हिंदूवादी साबित करने में लगे हैं पर सूत्रों की माने तो अब कांग्रेस में MP का चुनाव मात्र भगवान भरोसे ही होगा…आपसी खींचातन और मनमुटाव के चलते कांग्रेस के लुटिया डूबती दिखाई दे रही है !अभी चुनाव शुरू भी नहीं हुए और आदतानुसार सत्ता के लालची कांग्रेसी नेता MP में एक दूसरे की जड़े खोदने में लग गए हैं. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो MP का चुनावी प्रकरण हाईजैक कर लिए गया है और ज्योतिर्दित्य सिंधीआ को हाशिये पे डालने का पूरा मास्टरप्लान बन के तैयार है.

गौरतलब है, MP चुनावो के मद्देनज़र दिल्ली में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह ओर मीनाक्षी नटराजन ने आपसे में गुप्त और खास तालमेल बैठ लिया है, जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी भी अधूरे सपनो की लड़ाई लड़ते दिख रहे हैं…हालाँकि उनको पर्दे के पीछे से दिग्विजय सिंह समर्थन दे रहे हैं…पर उनकी भी मंशा सिंधिया और कमलनाथ को आपसे में उलझा के मलाई खाने की ज़यादा दिख रही है ..

congress flop show in MP

फिलहाल सिंधिया अपने दम पर टिकटों की लड़ाई लड़ रहे हैं. कमलनाथ और उनके सहयोगी बड़े नेताओं का सारा ज़ोर अब मालवा की 48 सीटों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को टिकिट लेने से रोकना है. सर्व ज्ञात है मालवा पूर्व में सिंधिया रियासत का हिस्सा रहा है और इस इलाके में सिंधिया का एकाधिकार माना जाता है. अगर कमल नाथ इस चालाकी में कामयाब हो जाते हैं तो सिंधिया पूरी तरह से मुख्यमंत्री रेस से बाहर हो जायेंगे.

अभी हाल ही में राहुल गाँधी के सामने ही सिंधिया और कमल नाथ में तू तू मैं मैं का ड्रामा भी हुआ, और राहुल गाँधी को खुद उठ के दोनों के बीच सुलह सफाई करवा के शांत करवाना पड़ा. MP प्रदेश कांग्रेस चुनावों से पहले ही दो धड़ों में बनती दिखाई दे रही है और दिग्विजय सिंह इस पूरे प्रकरण में मजे ले रहे हैं…वो शायद चाहते हैं की सिंधिया और कमलनाथ की आपस में खींच तान चलती रहे ताकि कांग्रेस जीत पे उनको मुख्यमंत्री पद का मौका मुफ्त में न मिल जाए…अंदर से दिग्विजय सिंह पूरी हवा बनवाने में जुटे हैं ताकि सिंधिया और कमलनाथ आपसे में भिड़ते रहे. सुनने में यहाँ तक आ रहा है की अगर कांग्रेस जीतती है तो सिंधिया पूरी कोशिश करेंगे की अपने समर्थक विधायकों के साथ मिल के गतिरोध उत्पन करेंगे !

कमल नाथ अपनी सूझ बोझ और राजनैतिक परिपक्वता के लिए जाने जाते हैं और गाँधी परिवार के वर्षों से वफदार रहे हैं साथ ही सिंधिया राहुल गाँधी के करीब हैं और उनके साथ सीधा व्यक्तिगत सम्पर्क रखते हैं. इन दोनों परिस्थितयों में निर्णायक ये होगा की कौन किसकी कितनी टिकट कटवाता है. कमल नाथ पूरी जान लगा रहे हैं की सिंधिया के वफादार कोई टिकट न ले पाएं.

scindia

उधर सिंधिया की राजसी अक्कड़ प्रदेश के पढ़े लिखे वर्ग को पसंद नहीं है, सिर्फ अपने पुराने साम्राज्य के ग्रामीण क्षेत्रो में रजवाड़ी प्रभाव रखने वाले सिंधिया नए ज़माने के पढ़े लिखे युवा वर्ग में उतने लोकप्रिय नहीं है. मध्य प्रदेश में युवा वर्ग रजवाड़ाशाही से कन्नी काटता है और जनसेवक को नेतृत्व देना चाहता है !

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