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HIMACHAL के इस गांव से IAS, IPS, HAS समेत 100 से ज्यादा अफसर, 6 महीने दुनिया से कटा रहता है ये इलाका जानिए

शीत मरूस्थल के नाम से मशहूर लाहौल-स्पीति का एक ऐसा गांव जहां हर घर से औसतन 3 व्यक्ति सरकारी क्षेत्र में उच्च पदों पर आसीन होकर देश की सेवा कर रहे हैं। साल में 6 माह बर्फ से ढके रहने के बाद भी लोगों का देश के लिए जज्बा आज जनजातीय क्षेत्र के लोगों के लिए मिसाल बनकर सामने आया है।

एक ही गांव से 100 से ज्यादा व्यक्ति उच्च पदों पर आसीन होकर देश की सेवा कर रहे हैं। हालांकि ठोलंग गांव बाकी राज्यों जैसा विकसित तो नहीं है, लेकिन आज भी यह गांव हिमाचल में अफसरों की खान के नाम से मशहूर है। ठोलंग गांव में करीब 35 घर हैं और इसकी जनसंख्या 420 हैं। गांव में साक्षरता दर भी 100 फीसदी है और अब तक यह गांव देश व प्रदेश को 100 गजेटेड अफसर दे चुका है।

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ठोलंग गांव देश को अब तक 3 आईएएस, 3 आईपीएस और 3 एचएएस अधिकारी दे चुका है। जबकि अन्य क्षेत्रों में भी इसी गांव के रहने वाले अधिकारियों की भरमार है। वहीं, इसी गांव के युवा आज विदेशों में भी अपना कारोबार कर रहे हैं। ठोलंग गांव से तीन आईएएस ऑफिसर मिले हैं। जिनमें सेवानिवृत्त चीफ सेक्रेटरी एएन विद्यार्थी हिमाचल, जम्मू-कश्मीर राज्य से एसएस कपूर व शेखर विद्यार्थी शामिल हैं।

आईपीएस में राम सिंह तकी, नाजिन विद्यार्थी, नोरबू राम, एचएएस में रघुवीर सिंह वर्मा, रामलाल ठाकुर, स्व. एसपी ठाकुर शामिल हैं। लाहौल स्पीति को पहला आईएएस, डॉक्टर, महिला डॉक्टर, इंजीनियर, एयर फोर्स अधिकारी भी इसी गांव ने दिए हैं। वहीं, इसी गांव से 23 डॉक्टर, 21 इंजीनियर और 19 उच्च शिक्षा अधिकारी भी अलग-अलग जगहों पर देश की सेवा कर रहे हैं। हालांकि गांव में आज भी पढ़ने लिखने की ज्यादा सुविधाएं नहीं है। इसलिए युवाओं ने कुल्लू, शिमला, चंडीगढ़ और दिल्ली जैसे शहरों में जाकर पढ़ाई की और उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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इसी गांव के लोग सिर्फ उपरोक्त क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि मैनेजमैंट (एमबीए) क्षेत्र में 12 और बैंक और बीमा क्षेत्र में 5, कृषि क्षेत्र में 2, एक डीपीआरओ, एक कानूनगो के साथ-साथ दो व्यक्ति साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कारोबार कर रहे हैं। ठोलंग गांव के डॉ. पीड़ी लाल, डीपीआरओ राम देव, शाम आजाद का कहना है कि उन्हें अपने गांव पर नाज है। यहां के लोगों ने विपरीत परिस्थितियां होते हुए भी अपने आप को मुख्य धारा से जोड़े रखा और निरंतर आगे निकलते गए। छह माह शेष विश्व से कटे रहने के बाद भी गांव के लोगों ने ऐसी तरक्की कर दिखाई कि आज ठोलंग गांव सिर्फ जनजातीय क्षेत्रों ही नहीं बल्कि दूसरे गांवों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन गया है।

स्थानीय ग्रामीण सुरेश कुमार ने बताया कि ठोलंग गांव में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए आईएएस अधिकारी एसएस कपूर ने अपनी मां के नाम से एक लाइब्रेरी बनाई है। इस लाइब्रेरी में कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबें रखी गई हैं। इसके अलावा गांव के अन्य लोग जो कि सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में अच्छा नाम कमा चुके हैं उन्होंने ने भी लाइब्रेरी में अनेक पुस्तकें दी हैं।

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