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राजीव भारद्वाज ने संभाला केसीसी बैंक के अध्‍यक्ष का कार्यभार,पद संभालते ही उनके इस बयान से उडी विरोधियों की रातों की नींद

नूरपुर भाजपा के वरिष्ठ नेता व जसूर निवासी डॉ. राजीव भारद्वाज ने वीरवार को कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक सीमित (केसीसीबी) के 12वें अध्यक्ष का कार्यभार संभाल ल‍िया। इस मौके पर उन्‍होंने कहा क‍ि सरकार ने जो ज‍िम्‍मेवारी उन्‍हें सौंपी है। उसे ईमानदारी से न‍िभाया जाएगा। बैंक की बेहतरी के ल‍िए अच्‍छी योजनाएं चलाई जाएगी। इस अवसर पर डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने सदा चुनौतियों का सामना किया है, आने वाले समय में भी वे उनका भी डटकर सामना करेंगे।

पूर्व सरकार के दौरान लोन में हुई अनियमितताओं पर भारद्वाज ने कहा कि यदि कोई भी अनियमितताएं हुई होंगी तो उस पर सख्त कदम उठाए जाएंगे और बैंक की तरफ से कड़ी से कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बैंक की पहली प्राथमिकता कस्टमर ही रहेंगे। बैंक खूब तरक्की करें और आगे बढ़े, इसके लिए कई योजनाएं बनाई जाएगी।अगर कोई घोटाला हुआ होगा, तो उसकी जांच भी करवाई जाएगी किसी को नहीं छोड़ा जायेगा !इस बयान से ही कई लोगों की सांसे थमी हुई हैं !

उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है उसपर खरा उतरने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर व‍िधायक मुल्‍ख राज प्रेमी, रव‍ि धीमान, अर्जुन ठाकुर व व‍िक्रम जर‍ियाल भी उन्हें बधाई देने पहुंचे तीन सदस्यीय गठित बोर्ड में डॉ. राजीव भारद्वाज अध्यक्ष, ऊना के रमेश कुमार व धर्मशाला के दाड़ी निवासी रणजीत राणा को सदस्य मनोनीत किया गया है। हालांकि यह नियुक्तियां छह माह के लिए की गई हैं।

बता दें कि बैंक में अनियमितताओं के आरोपों के चलते अप्रैल माह में बीओडी को सस्पेंड कर दिया गया था। इस मौके पर उनका बैंक के कर्मचार‍ियों सह‍ित व‍िधायक मुल्‍ख राज प्रेमी, रव‍ि धीमान, अर्जुन ठाकुर व व‍िक्रम जर‍ियाल ने भी उन्‍हें बैंक मुख्‍यालय पहुंचकर बधाई दी। सहकारिता विभाग के पंजीयक आइएएस डॉ. अजय शर्मा ने इस बाबत कुछ द‍िन पहले ही अधिसूचना जारी की थी। तीन सदस्यीय गठित बोर्ड में डॉ. राजीव भारद्वाज अध्यक्ष, ऊना के रमेश कुमार व धर्मशाला के दाड़ी निवासी रणजीत राणा को सदस्य मनोनीत किया गया है।

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अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि 6 अप्रैल, 2018 को अनियमितताओं के कारण पुराने बोर्ड को भंग करने के बाद केसीसीबी निदेशक मंडल की चुनाव प्रक्रिया 28 जुलाई से शुरू कर दी गई थी। पूर्व अध्यक्ष जगदीश सिपहिया ने बोर्ड को भंग करने के मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और इस कारण सरकार ने चुनाव प्रक्रिया रोक दी थी। 25 अक्टूबर को हाईकोर्ट की ओर से जगदीश सिपहिया की याचिका को खारिज करने के बाद सहकारिता विभाग ने यह अधिसूचना जारी की थी।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने के.सी.सी.बी. का निदेशक मंडल भंग किया था और उपायुक्त कांगड़ा को प्रशासक नियुक्त किया था। घोटालों के लिए सुॢखयों में आए के.सी.सी.बी. का मामला विधानसभा के बजट सत्र में गूंजा था। इस दौरान बैंक के एन.पी.ए. के अलावा विदेश दौरों और ऋण आबंटन में आर.बी.आई. व नाबार्ड के नियमों को दरकिनार करने की बात कही थी। सत्र की समाप्ति के बाद सरकार ने बैंक के निदेशक मंडल को भंग करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद रजिस्ट्रार सहकारिता विभाग ने पहले 6 अप्रैल और दोबारा 19 जुलाई को बैंक अध्यक्ष समेत सभी निदेशकों को निलंबित कर दिया था। 6 अप्रैल के आदेश को 19 जुलाई को तकनीकी कारण बताते हुए वापस ले लिया था और उसी दिन नए आदेश पारित कर फिर से उन्हें निलंबित कर दिया था। बैंक के अध्यक्ष जगदीश सिपहिया ने न्यायालय में याचिका दायर की और अब इसे खारिज कर दिया गया है।

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