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VIDEO : पहले पाकिस्तान जाकर मोदी को हटाने की भीख मांगते थे,अब खुलेआम मोदी को जिन्दा जलाने का समय आ गया ऐसा बयान कोंग्रेसी नेता दे रहे हैं

कांग्रेसी नेताओं की प्रधानमंत्री के प्रति हो रही बदजुबानी थमने का नाम नही ले रही हैं, अब इस लिस्ट में ताजातरीन नाम टी बी जयचंद्र का जुड़ा हैं। टी बी जयचंद्र कर्नाटक से कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं और पुरानी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। नोटबन्दी की दूसरी सालगिरह पर प्रधानमंत्री पर हमलावर होते हुए उन्होंने कहा कि ‘नोटबंदी की नाकामी के बाद अब सही वक्त आ गया है कि पीएम मोदी को जिंदा जला देना चाहिए।’कोंग्रेसी नेता जिस तरह की गन्दी भाषा का इस्तमाल मोदी के लिए कर रहे है लोकसभा चुनावों में यही उनकी हार का कारण बनेगा,ये कोंग्रेसी देश को मिले ईमानदार प्रधानमंत्री को हजम नहीं कर पा रहा

शुक्रवार को तुमकुरू में टीबी जयचंद्र ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने (नोटबंदी के बाद) चीजों को ठीक करने के लिए 50 दिन का वक्त मांगा था, इस परीक्षा में पास नहीं होने पर उन्होंने लोगों से कहा था कि वे उन्हें जिंदा जला सकते है….संभवत: उन्हें जिंदा जलाने का समय आ गया है। वह नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे थे। पूर्व मंत्री ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री की लोकतंत्र में तनिक भी आस्था है, तो उन्हें तत्काल पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने जयचंद्र के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी मापदंड से यह बिल्कुल घृणित बयान है। उन्होंने कहा कि सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इस तरह का निंदनीय बयान जयचंद्र की तरफ से आया है, जो राज्य के कानून और संसदीय कार्य मंत्री रह चुके हैं। आपको बता दें कि टीबी जयचंद्रा अपने बयान में ही एक गलती कर गए हैं, क्योंकि पीएम मोदी ने नोटबंदी के समय जनता से 15 दिन नहीं बल्कि 50 दिन की मौहलत मांगी थी।

दरअसल आठ नवंबर 2016 और शाम आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 1000 और 500 रुपये के नोट को बंद करने की घोषणा की थी। नोटबंदी के चंद दिनों बाद देश के कई राज्यों में नगर निकाय और विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी ने एक के बाद एक जीत हासिल की और विपक्ष दलों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।

नोटबंदी के चंद दिनों के बाद नवंबर के महीने में ही गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और चंडीगढ़ नगर निकाय चुनाव हुए। विपक्षी दल नोटबंदी को मुद्दा बनाकर जीत हासिल करने का ख्वाब देख रहे थे, लेकिन जब चुनावी नतीजे आए तो विपक्ष के सपने साकार नहीं हो सके। बीजेपी को नोटबंदी का सियासी फायदा मिला। इन राज्यों में बीजेपी को पहले से ज्यादा बड़ी जीत हासिल हुई।

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नोटबंदी के चार महीने के बाद ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव हुए। बीजेपी ने इन राज्यों में से दो राज्यों में प्रचंड जीत हासिल की। उत्तर प्रदेश में नोटबंदी का मुद्दा इस कदर हावी रहा कि सपा, बसपा सहित कांग्रेस ने हर चुनावी रैलियों में उठाया, लेकिन नतीजा इन सभी के खिलाफ गया। बीजेपी को नोटबंदी का फायदा मिला और चौथे पायदान से पहले पर पहुंच गई। बीजेपी ने रिकॉर्ड सीटों के साथ जीत हासिल की। उत्तर प्रदेश की 403 सीटों पर 324 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की। मणिपुर, गोआ और उत्तराखंड में भी बीजेपी सरकार आयी। हाल में गुजरात मे सत्ता वापसी किया और हिमांचल भी कांग्रेस से छीन लिया। कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

यह नोटबन्दी पर जनता की मुहर थी, दुनिया की सबसे बड़ी अदालत का फैसला जिसमे प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह से पास हुए। जनता को अगर मोदी को जलाना होता तो नोटबन्दी के बाद के चुनावो में बीजेपी को जनता सबक सिखाती लेकिन यहाँ तो उल्टा कांग्रेस को नुकसान हुआ। देखा जाए तो टी बी जयचंद्र यहाँ भी गलत साबित हुए।

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