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ब्रेकिंग न्यूज़ : प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों के आने वाले हैं अच्छे दिन,मोदी सरकार जल्दी ही देने जा रही है ये बहुत बड़ा तौफा करोड़ों कर्मचारियों को होगा फायदा

मोदी सरकार करोड़ों निजी कर्मचारियों को राहत देने की तैयारी कर रही है. अगर मोदी सरकार ये करने में कामयाब होती है तो देश की वो पहली सरकार होगी जो प्राइवेट कर्मचारियों को इतना बड़ा तौफा देगी।सूत्रों के अनुसार सरकार इस साल के अंत तक ग्रेच्युटी मिलने की समय सीमा को घटाने की तैयारी कर रही है. अभी किसी भी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी को 5 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी मिलने का प्रावधान है. अब इस समय सीमा को घटाकर तीन साल करने की तैयारी चल रही है.

पर क्या आप जानते हैं कि ग्रेच्युटी क्या है? ग्रेच्युटी की गणना कैसे की जाती है? ग्रेच्युटी का हक कब मिलता है? आइए एक नजर इन सभी सवालों पर डालते हैं: सरल शब्दों में कहा जाए तो ग्रेच्युटी आपके वेतन, यानी आपकी सैलरी का वह हिस्सा है, जो कंपनी या आपका नियोक्ता, यानी एम्प्लॉयर आपकी सालों की सेवाओं के बदले आपको देता है. ग्रेच्युटी वह मौद्रिक लाभ है जो कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर कंपनी द्वारा मिलता है.

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सरकार 1972 में ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम यानी पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट लेकर आई थी. इससे पहले, कंपनियों/नियोक्ता या संस्थानों द्वारा कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी का भुगतान कानूनी नियमों और प्रक्रिया के तहत अनिवार्य नहीं था. इस अधिनियम के तहत कंपनियों के लिए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान करना अनिवार्य किया गया बशर्ते वे कुछ नियम व शर्ते पूरी करते हों.

नई दिल्ली: मोदी सरकार चुनाव से पहले करोड़ों निजी कर्मचारियों को राहत देने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के अनुसार सरकार इस साल के अंत तक ग्रेच्युटी मिलने की समय सीमा को घटाने की तैयारी कर रही है. अभी किसी भी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी को 5 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी मिलने का प्रावधान है. अब इस समय सीमा को घटाकर तीन साल करने की तैयारी चल रही है. पर क्या आप जानते हैं कि ग्रेच्युटी क्या है? ग्रेच्युटी की गणना कैसे की जाती है? ग्रेच्युटी का हक कब मिलता है? आइए एक नजर इन सभी सवालों पर डालते हैं:

सरल शब्दों में कहा जाए तो ग्रेच्युटी आपके वेतन, यानी आपकी सैलरी का वह हिस्सा है, जो कंपनी या आपका नियोक्ता, यानी एम्प्लॉयर आपकी सालों की सेवाओं के बदले आपको देता है. ग्रेच्युटी वह मौद्रिक लाभ है जो कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर कंपनी द्वारा मिलता है.

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सरकार 1972 में ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम यानी पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट लेकर आई थी. इससे पहले, कंपनियों/नियोक्ता या संस्थानों द्वारा कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी का भुगतान कानूनी नियमों और प्रक्रिया के तहत अनिवार्य नहीं था. इस अधिनियम के तहत कंपनियों के लिए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान करना अनिवार्य किया गया बशर्ते वे कुछ नियम व शर्ते पूरी करते हों.

अगर किसी शख्स ने किसी कंपनी में लगातार 4 साल, 10 महीने, 11 दिन तक काम किया है तो उसकी सेवा को पांच साल की अनवरत सेवा मानते हुए वह ग्रेच्युटी के लिए पात्र हो जाता है. आमतौर पर पांच साल की सेवाओं के बाद ही कोई भी कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार बनता है. हालांकि कर्मचारी की मृत्यु हो जाने या विकलांग हो जाने की स्थिति में उसे ग्रेच्युटी 5 साल से पहले भी दी जा सकती है.

साल-दो-साल में नौकरी बदलने पर अभी ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिल पाता. सरकार पांच साल से कम करके ग्रेच्युटी मिलने की समय सीमा को घटाकर तीन साल करने पर विचार कर रही है. लेबर यूनियन तो इसे घटाकर एक साल करने की मांग कर रहा है. अगर ऐसा हुआ तो प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत 1 करोड़ 14 लाख (2011-12 के आंकड़ों के मुताबिक) लोगों को इसका फायदा मिलेगा.

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सरकार फिक्सड टर्म एम्पलाई (संविदाकर्मी) को भी ग्रेच्युटी का लाभ देने की तैयारी है. सामान्यतया ऐसे कर्मियों का अनुबंधन एक साल या तीन साल का होता है. इस अवधि के पूरा होने पर नियोक्ता कर्मचारी के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर उसे रिन्युअल कर देता है. ऐसे कर्मचारियों को अनुपातिक रूप से ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा. यानी जितने समय की सर्विस होगी उस अनुपात में नियोक्ता कर्मचारी को लाभ देगा. इसके लिए जरूरी नियमों में बदलाव की बात चल रही है. हालांकि, अभी इस बारे में बहुत कुछ स्पष्ट होना बाकी है. आशंका जताई जा रही है कि इस नियम से बचने के लिए नियोक्ता संविदाकर्मियों का अनुबंध जल्द समाप्त कर सकते हैं. ऐसे में सरकार को कुछ और प्रावधान भी करने होंगे.

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