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पतंजलि लाएगा पर्यटन, सांस्कृतिक शिक्षा व रोजगार के अनेकों अवसर”

Viral Bharat / November 29, 2018

मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार हिमाचल प्रदेश के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए सदैव तत्पर है। ‘प्रदेशवासियों का हित’ प्रदेश के कुशल एवं सशक्त नेतृत्व का एकमात्र लक्ष्य एवं सदैव सर्वोपरि प्रेरणा-सूत्र है। ‘हिमाचल के सुखद एवं समृद्ध भविष्य का निर्माण’ ही वर्तमान सरकार की कार्यशैली का मूलमंत्र है। अपनी संस्कृति के सरंक्षण एवं विकास और उससे प्रेरित जीवनमूल्यों के प्रवर्धन के लिए प्रदेश सरकार किसी भी हद तक जाने से कभी भी संकोच नहीं करेगी।

इसी प्रेरणा के साथ पतंजलि योग पीठ (ट्रस्ट) हरिद्वार उत्तराखंड को गांव कल्होग, तहसील कंडाघाट, जिला सोलन में योग एवं आयुर्वेद से संबंधित चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान तथा जैविक उत्पाद एवं औषधीय पौधों (हरड़ बेहड़ा, कैंथ, गुच्छी) के उत्पादन हेतू भूमि पट्टे पर आबंटित की गई है। पतंजलि को आवश्यकतानुसार 93 बीघा भूमि पूर्ण रूप से नियमानुसार ही पट्टा पर दी गई है। पतंजलि योगपीठ का स्वास्थ्य, शिक्षा एवं जड़ी-बूटी कृषि के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान है। भारतीय स्वास्थ्य-विधा ‘योगशास्त्र’ के पुनरुद्धार एवं आधुनिक अवतरण के लिए स्वामी रामदेव जी के योगदान को कोई नकार नहीं सकता।

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वहीं आयुर्वेद आधारित विश्वस्तरीय जैविक उत्पादों और औषधियों के निर्माण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में पतंजलि आज सर्वोपरि और सम्मानित नाम है। पतंजलि भारतवर्ष की एकमात्र स्वदेशी कंपनी है जिसने बड़ी ही मजबूती से यह साबित किया है कि योग, आयुर्वेद आदि भारतीय वैज्ञानिक पद्धतियों और सांस्कतिक मूल्यों को आधार बनाकर भी विश्वस्तरीय एवं प्रतिस्पर्धा की कसौटी पर सर्वश्रेष्ठ उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

अतिशयोक्ति न होगी यदि कहा जाए कि पतंजलि ही एकमात्र स्वदेशी कंपनी है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरते हुए सभी विदेशी तथाकथित धुरंधर कम्पनियों को भी आंखों से आंखें मिलाकर एक से एक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद निर्मित कर भारतीयता का परचम लहरा रही है।

प्रदेश सरकार और पतंजलि के बीच बनी सहमति के अनुसार कल्होग, कंडाघाट को एक विशाल केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है जहां एक ओर योग व आयुर्वेद-चिकित्सा अनुसंधान एवं संबंधित शिक्षा का प्रचार-प्रसार व पोषण होगा, साथ ही वृहद स्तर पर जड़ी-बूटी उत्पादन एवं प्रशिक्षण के कार्य भी निष्पादित किए जाएंगे। और इस सबका सर्वप्रथम लाभ सीधे तौर पर प्रदेशासियों को ही मिलेगा।

इससे न केवल राजकोषीय राजस्व प्राप्त होगा, बल्कि प्रदेश के स्थानीय युवाओं को रोजगार के भी पर्याप्त अवसर मिलेंगे। वहीं सरकार के इस कदम से दूरगामी सकारात्मक परिणाम यह होंगे कि हिमालयी क्षेत्र के औषधीय पौधों की मांग और परिणास्वरूप खरीदारी लगातार बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ हिमाचल प्रदेश के किसानों को मिलेगा।

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यह लीज नए सिरे से दी गई है व सारे नियमों को ध्यान में रखते हुए एवं उनके विस्तृत अध्ययन के पश्चात ही प्रदान की गई है। भाजपा की पूर्व सरकार ने 2011 में पहले भी पतंजलि को लीज दी थी, लेकिन पूर्व कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही वह लीज रद्द कर दी थी। कांग्रेस की वो सरकार स्वदेशी की घोर विरोधी और अवसरवादिता की जीवंत प्रतिमूर्ति होने का सबसे उपयुक्त उदाहरण थी, जिस कारण भारतीय मूल्यों से सराबोर हिमाचल वासियों ने देश की चिरंतन व समृद्ध संस्कृति के उत्थान के विरोधियों को नकारते हुए स्वदेशप्रेम से परिपूर्ण वर्तमान सशक्त एवं स्वावलंबी नेतृत्व को प्रदेश की कमान सौंपी।
इस लीज से एक ओर जहां एकमुश्त 2.21 करोड़ रुपए सरकारी खजाने में आएंगे, वहीं उपलब्धि की दृष्टि से आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश योग शास्त्र का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।

जिसका हजारों हिमाचलियों को परोक्ष व अपरोक्ष रूप से लाभ ही होगा। वर्तमान सरकार का यह कदम हिमाचल प्रदेश की पहचान को विश्व के पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेगा, वहीं प्रदेश सरकार के जैविक कृषि को बढ़ावा देने के संकल्प को भी गति और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को बल देगा।

भाजपा सरकार नए उद्योगों को हिमाचल प्रदेश में आकर्षित कर रही है, जबकि पूर्व कांग्रेस सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने में असफल रही है। केंद्र सरकार के ‘Make in India’ Campaign की तर्ज पर प्रदेश सरकार ‘Invest in Himachal’ Campaign चला रही है, यह प्रक्रिया भी उसी का हिस्सा है।
पतंजलि योग पीठ ने लगभग 15 करोड़ रुपए खर्च किए हैं जिनसे आगामी समय में विभिन्न गतिविधियों में करोड़ों का निवेश किया जाएगा। साथ ही उत्पादन भी होगा। यही नहीं बेरोजगारों के लिए रोजगार के द्वार भी खुलेंगे।