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विजिलेंस को अफसरों पर केस दायर करने की छूट उपधारा 17 (ए) जोड़ भ्रष्ट कर्मियों पर जयराम सरकार का शिकंजा

मोदी सरकार के प्रीवेंशन ऑफ क्रप्शन एक्ट में संशोधन के बावजूद हिमाचल के सरकारी कर्मचारियों पर स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो बिना अनुमति के केस दर्ज कर सकेगी। इसके लिए हिमाचल सरकार भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 3 (2) की उपधारा 17(ए) के तहत स्टेट विजिलेंस को ये शक्तियां प्रदान कर रही है। जयराम सरकार का ये बहुत अच्छा कदम है मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी का भ्रष्टाचार के खिलाफ ये एक और बड़ा प्रहार है। जयराम सरकार की ये ईमानदार निति ही आज सरकार की सबसे बड़ी ताकत है।

इसके तहत घूस तथा लेनदेन के सभी प्रकार के मामलों में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो को सरकारी अफसरों के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए सरकार की अनुमति लेना जरूरी नहीं होगा। फाइल तथा दस्तावेज पर आधारित भ्रष्टाचार के मामलों में ही विजिलेंस को सरकार से अनुमति लेना आवश्यक होगी।

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जाहिर है कि हिमाचल प्रदेश के गेजेटिड ऑफिसर के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेने का प्रावधान है। केंद्रीय अधिकारियों, कर्मचारियों पर लागू भ्रष्टाचार के इस अधिनियम को राज्य सरकारें भी अपना रही है। इसी कड़ी में हिमाचल सरकार ने अधिनियम की उपधारा 17 (ए) को प्राथमिकता दी है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष रूप से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में नॉन गेजेटिड ऑफिसर के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए सरकार की अनुमति लेना जरूरी नहीं होगा।

मसलन कोई अधिकारी-कर्मचारी अगर रिश्वत ले रहा है या दूसरे प्रकार का प्रत्यक्ष रूप से अनैतिक लाभ प्राप्त कर रहा है, तो उसके खिलाफ विजिलेंस सीधे तौर पर एफआईआर दर्ज कर सकती है। भ्रष्टाचार के आरोप अगर फाइल केस पर आधारित है, तो उन मामलों में सरकार की अनुमति के बिना केस दर्ज नहीं होगा। बहरहाल, प्रीवेंशन ऑफ क्रप्शन एक्ट के इस नए पेंच से अब हिमाचल के अधिकारी-कर्मचारी विजिलेंस के शिकंजे से नहीं बच सकेंगे।

इस प्रावधान के बाद सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को स्टेट विजिलेंस घूस के मामले में किसी भी समय बिना अनुमति के उठा सकती है। इसके लिए कार्रवाई दल को अपने पुलिस अधीक्षक से अनुमति लेना जरूरी होगी। बताते चलें कि केंद्रीय कर्मचारियों को प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट में मिले राहत के बाद हिमाचल में भी स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो की धरपकड़ के मामलों में गिरावट दर्ज हुई है। इस कारण घूसखोरी में संलिप्त अधिकारी-कर्मचारी बेहद खुश थे। लिहाजा राज्य सरकार का ताजा फैसला इस फेहरिस्त में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए नींद उड़ाने वाला साबित हो सकता है।

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फाइल पर आधारित भ्रष्टाचार के मामलों में ही आरोपी अफसरों के खिलाफ विजिलेंस को सरकार से अनुमति लेनी होगी। सीधे रिश्वत व लेनदेन के मामलों में विजिलेंस बिना अनुमति के जांच शुरू कर सकती है और एफआईआर दर्ज करने के लिए अधिकृत होगी

—बीके अग्रवाल, मुख्य सचिव, हिमाचल सरकार

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