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धारा 118 को लेकर कांग्रेस के झूठ की राजनीती को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का करारा जवाब,खोली कांग्रेस के झूठ की पोल

Viral Bharat / August 9, 2019

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी ने एक बार फिर खुद सामने आकर कांग्रेस के झूठ की पोल खोली है। कांग्रेस की राजनीती वैसे शुरू से ही झूठ पर चलती आई है। कांग्रेस सरकार के पास हिमाचल की जयराम सरकार को लेकर कोई मुद्दा नहीं है यही वजह है कि कांग्रेस हमेशा 118 पर लोगों को गुमराह करती रही है।

हिमाचल की धारा 118 में ना तो कोई बदलाव होगा न इसे हटाया जाएगा और धारा 118 की जम्मू कश्मीर की अनुच्छेद- 370 से तुलना करने वालो को मुख्यमंत्री जयराम ने नसीहत दी है. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि नासमझ लोग 370 और 118 की तुलना कर रहे हैं. भू-सुधार कानून की धारा के तहत में भी बाहरी लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं.कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है यही वजह है कांग्रेस इस मुद्दे पर लोगों को झूठ बोल कर गुमराह कर रही है। जैसे कांग्रेस ने बाहरी राज्यों के लोगो को हिमाचल में आसानी से नौकरी मिल जाए इसलिए प्रक्रिया में बदलाव किया था और आरोप भाजपा पर मढ़ दिया उसी तरह ये हरकत कांग्रेस धारा 118 पर कर रही है। भाजपा ने कल ही मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लेकर कांग्रेस के फैसले को पलट दिया और हिमाचलियों के हित में फैसला लिया।

जम्मू कश्मीर की अनुच्छेद- 370 को संवैधानिक तरीके से लगाया गया था जिसे केंद्र सरकार ने हटा दिया गया है, जबकि हिमाचल में रेवन्यू के लिए ही धारा 118 की व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि हिमाचल की जमीनों की रक्षा के लिए ही इसे बनाया गया था लेकिन बाहरी राज्यों के लोगो और यहा लगने वाले पावर प्रोजेक्ट और उद्योगों को जमीन दी जा रही है.

इसके लिए धारा 118 की व्यवस्था की गई है और इसकी तुलना जम्मू कश्मीर की अनुच्छेद-370 से नहीं किया जा सकता है.अब जब हिमाचल में निवेश आएगा इंडस्ट्री लगेगी तो इंडस्ट्री लगाने के लिए उन्हें जमीन मोहिया करवाना सरकार का काम है। बाकि किसी बाहरी राज्य के व्यक्ति को हिमाचल में जमीन नहीं दी जा रही है। वो काम कांग्रेस ने किया था प्रियंका गाँधी का मकान शिमला में बनना इसका सबसे बड़ा उदहारण है।

सीएम ने कहा कि अनुच्छेद-370 और धारा 118 में कोई समानता नहीं है. इस तरह के प्रावधान पूर्वोत्तर राज्यों में भी है. यह धारा इसलिए लाई गई थी ताकि बाहरी लोग पहाड़ में जमीन खरीद कर यहां के लोगों को जमीनों का चौकीदार न बना सकें.