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मंत्री का एक फोन और फिर पड़ा छापा,पुराने से पुराने घोटाले भी अब सामने आ रहे हैं,ईमानदार सरकार का ये प्रयास विकास का

घोटालेबाजों की खैर नहीं जयराम सरकार में पुराने से पुराने घोटाओं की परतें अब खुलने जा रही हैं। 2013 से चले आ रहे घोटाले की परतें भी अब जयराम सरकार में खुलती हुई नजर आ रही हैं। दो करोड़ की दवाएं आखिर कहां हैं, इसे लेकर जिला सीएमओ शिमला ने गुरुवार को मतियाणा ब्लॉक में छापा मारा है। ‘आखिर कहां गई दो करोड़ की दवाएं’ मामले पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री ने जिला सीएमओ से फोन के माध्यम से संबंधित केस पर जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा है। लिहाजा जिला सीएमओ सुबह ही शिमला से 50 किलोमीटर दूर मतियाणा चले गए।

vipin parmar cm jairam के लिए इमेज परिणाम

जिला सीएमओ सहित उनकी चार सदस्यीय टीम द्वारा दवा रिकार्ड को खंगाला जा रहा है। गौर हो कि शिमला में दो करोड़ की दवा आबंटन गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। शिमला के मतियाणा ब्लॉक में हुए इस गोलमाल की पुष्टि एजी के ऑडिट रिपोर्ट में हुई है, जिसमें हैरान कर देने वाला खुलासा यह हुआ है कि अधिकारियों द्वारा दवा आबंटन संबंधित दस्तावेजों को स्वास्थ्य विभाग को सौंपा ही नहीं गया है। इन सभी बिंदुओं को लेकर रिकार्ड की जांच की जा रही है। मौके पर अभी दस्तावेजों को चैक किया गया है।

रिपोर्ट को जल्द ही प्रदेश सरकार को सौंपा जाने वाला है। फिलहाल ऑडिट के दौरान भी यह पाया गया है कि संबंधित अधिकारियों से दवाआें को लेकर कोई भी दस्तावेज मौके पर ऑडिट अधिकारियों को नहीं दिए गए हैं। कई बार ऑडिट पैरा को लेकर जवाब मांगा गया है, जो अभी तक नहीं मिलने की सूचना है। फिलहाल ऑडिट रिपोर्ट में 291.89 लाख की गड़बड़ बताई गई है।

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वहीं सात फरवरी 2018 को ऑडिट पैरा लगा है, जिसमें दवाओं की खरीद के बारे में भी बताया गया है। ऑडिट पैरा में उठाए गए सवालों को लेकर अब जिला सीएमओ छानबीन में लगे हैं। फिलहाल अब देखना है कि आखिर पांच वर्षों से दवा आबंटन का रिकार्ड में क्या निकलकर सामने आता है। रिकार्ड अभी तक क्यों नहीं मिल पाया है, इसकी पूछताछ भी की जा रही है।

एजी द्वारा किए गए ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि वर्ष 2013 जनवरी से दवा रिकार्ड के दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं। जानकारी के मुताबिक स्टेट सिविल सप्लाई के माध्यम से भी दवाआें की खरीद जा रही है। इसके अलावा अन्य फर्म से भी समय दर समय दवाआें की खरीद की जाती है, जिसे सिविल अस्पताल, प्राइमरी हैल्थ सेंटर और हैल्थ सब-सेंटर को आबंटित होती है, लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर मतियाणा के संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई भी दस्तावेज ऑडिट के दौरान प्राप्त नहीं हुए हैं .

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