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भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने के लिए जयराम सरकार ने खोले विजिलेंस के हाथ,लिया बड़ा फैसला भ्रस्टचारी कांपे थर थर

भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए हिमाचल सरकार ने विजिलेंस के हाथ तक खोल दिए हैं। पिछली कांग्रेस सरकार में ये आज़ादी विजलेंस को नहीं थी लेकिन मुख्यमंत्री की ईमानदार छवि का ही ये नतीजा है आज विजलेंस को ये शक्ति सरकार द्वारा दी गयी है। अब किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े हर मामले की जांच शुरू करने से पहले विजिलेंस को सरकार से अनुमति नहीं लेनी होगी। सरकार के निर्देश पर विजिलेंस ने संशोधित नियमावली लागू कर दी है।

CM JAIRAM

2005 से कांग्रेस जी भ्रस्ट अफसर को बचाती आ रही थी वो भ्रस्ट अफसर ना जाने कितनो को लूट चूका था। लेकिन जयराम सरकार के सत्ता में आने के बाद उस भ्रस्ट अफसर पर जांच बैठी और अब वो सस्पेंड है.

केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन के बाद विजिलेंस की ओर से की जाने वाली प्रारंभिक जांच अथवा जांच के लिए धारा 17-ए के तहत सरकार से अनुमति लेने के संबंध में प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब अगर किसी मामले की जांच के दौरान सरकार के अधिकारी या कर्मचारी का नाम व भूमिका स्पष्ट है और आरोपी मुलाजिम ने अपने आधिकारिक दायित्व के निर्वहन के दौरान किसी सिफारिश या निर्णय लिया है तो ही उन मामलों में जांच के लिए विजिलेंस सरकार से अनुमति मांगेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुमति मांगने के लिए तभी फाइल भेजी जाएगी, जब यह दो शर्तें पूरी हो रही हैं। प्रधान सचिव विजिलेंस संजय कुंडू ने इसकी पुष्टि की है। सरकार के निर्देश के बाद प्रदेश विजिलेंस ने एचपी विजिलेंस मैनुअल में बदलाव कर इसके दूसरे चैप्टर के पैरा 4.1 में 4.1-ए जोड़ कर बदलाव को लागू कर दिया है।

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