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जयराम सरकार की विजिलेंस को मंजूरी वीरभद्र सरकार के समय हुआ एक और गड़बड़झाला आया सामने,सदमें में कांग्रेसी

कांग्रेस ने प्रदेश को क्या दिया आज तक के अपने कार्यकाल में सिर्फ घोटाले फर्ज़ीवाड़े। जो काम सत्ता में रहते हुए केंद्र की कांग्रेस सरकार करती थी भ्रस्ट को बचाना घोटाले करना वो काम हिमाचल कांग्रेस करती आई है। लेकिन अब सत्ता में जयराम सरकार है जो इन्ही फर्जीवाड़ों को सामने ला रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी की इसी कार्यशैली के दीवाने हैं प्रदेशवासी खुद मोदी जी अमित शाह जी जयराम ठाकुर जी की ईमानदारी की प्रसंशा कर चुके है।

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जयराम सरकार ने पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार के समय पर्यटन विकास बोर्ड में हुई अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए हैं। विजिलेंस ने सरकार से अनुमति मांगी थी, जिसे मंजूरी दे दी है। भाजपा चार्जशीट में लगे आरोपों के मुताबिक पर्यटन विकास बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। चार्जशीट में आरोप लगे हैं कि पूर्व की वीरभद्र सरकार ने पर्यटन विकास बोर्ड का गठन किया गया था, जिसमें एक उपाध्यक्ष की नियुक्ति की, जो केवल सरकारी गाड़ी का प्रयोग करने के अतिरिक्त पर्यटन विकास के लिए कोई कार्य नहीं किया।

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इस विकास बोर्ड द्वारा एशियन विकास बैंक की सहायता से शिमला में सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया। भाजपा ने चार्जशीट में प्रदेश के युवाओं के स्थान पर पर्यावरण विशेषज्ञों की नियुक्ति श्रीलंका से लाखों रुपए की मासिक फीस देने के आरोप लगे हैं।

कथित आरोप में श्रीलंका, यूके और देशभर के अनेक स्थानों से आर्किटेक्ट आदि नियुक्त किए गए हैं, जिसमें हिमाचल प्रदेश से नौकरी नहीं दी गई। यह नौकरियां कारपोरेट केयर नाम की संस्था के द्वारा आउटसोर्स करके दी गईं, जिनमें एक विशेषज्ञ के लिए 52 हजार पर हस्ताक्षर लिए जाते रहे तथा उसे केवल 25 हजार रुपए दिए जाता रहे।

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भाजपा चार्जशीट में आरोप लगे हैं कि करीब 22 करोड़़ से अधिक केवल प्रोजेक्ट में वेतन आदि पर खर्च किया गया। रिज पर चर्च के सौंदर्यीकरण पर 20 करोड़़ से अधिक खर्च किया गया, जिसके लिए अनुभवनहीन सलाहकार नियुक्त किए गए थे, जिन्हें लाखों का वेतन दिया गया।ऐसे में अब स्टेट विजिलेंस इन सभी मामलों की जांच करेगी।

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