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छात्रों के एनीमिया-टीबी टेस्ट अब स्कूल में ही,छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर जयराम सरकार का बहुत अच्छा निर्णय

Viral Bharat / October 9, 2019

देश में बच्चों में होने वाले प्रमुख तीन रोगों में एनीमिया शामिल हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों में प्रमुख दस रोगों की हैल्थ रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के बच्चों मे एनीमिया का होना तीसरे नंबर की बीमारी के तौर पर उभर कर सामने आ रहा है। पहला डायरिया का रोग और दूसरा दांत के रोगों से प्रभावित बच्चों के मामले ज्यादा रहते हैं, जिस पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसका कंट्रोल कार्यक्रम चल रहा है, लेकिन इसके बाद अब पीलिया को लेकर विभाग कमर कसने लगा है।

नतीजा यह कि बच्चे कम उम्र में ही कई अन्य रोगों के चपेट में हैं, जिसे लेकर प्रदेश में बच्चों का एक वर्ष में दो बार एनीमिया टेस्ट होना शुरू किया जा रहा है। सरकार द्वारा स्कूल में एनीमिया पर बच्चों को जागरूक करने के लिए डाक्टरों को तय शेड्यूल के तहत बुलाने और उनका लेक्चर आयोजन करने के निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ये निर्देश सभी जिला सीएमओ को भी जारी किए हैं।

निर्देशों के तहत हर स्कूल में एनमिया फ्री विषय पर प्रार्थना सभा में भी बच्चों को दूर रहने के प्रति जानकारी दी जाएगी, जिसमें बच्चों को फास्ट फूड से दूर रहने के बारे में जागरूक किया जाएगा। बच्चों को बताया जाएगा कि इन खाद्य पदार्थो के सेवन से बच्चे बड़े होकर कई रोगों के चपेट में भी आ जाते हैं।

राष्ट्रीय बाल सुरक्षा प्रोग्राम के तहत होंगे क्षय रोग के खात्मे प्रयास, शुरुआत में ही पता लग सकेगी बीमारी राज्य हिमाचल प्रदेश में अब सभी स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। इसमें टीबी रोग की विशेष रूप से पहचान करने के लिए छात्रों की जांच की जाएगी। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा आरवीएस कार्यक्रम के तहत टीबी के खात्मे पर भी कार्य किया जाएगा, जिससे शुरुआती दौर में ही बीमारी का पता लगाकर पूरा इलाज किया जा सकेगा। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2022 में प्रदेश को टीबी मुक्त करने को विशेष योजना बनाई गई है। इसमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा सबसे पहले बच्चों को पूरी तरह से सुरक्षित किए जाने की योजना पर काम किया जाएगा। इसमें स्वास्थ्य कार्यकर्ता हर स्कूल में पहुंचकर टीबी बीमारी को लेकर जांच करेंगे। इससे पहले अब तक टीवी बीमारी की जांच के लिए मात्र अस्तपालों पर ही निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन पहली बार स्कूली छात्रों को स्कूल में ही जांच की सुविधा मिल पाएगी। इससे टीबी को जड़ से मिटाने के लिए बड़ी मदद मिल सकेगी।