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ब्रेकिंग न्यूज़ : मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में आ रही शिकायतों को लेकर अधिकारियों की लापरवाही पर कार्रवाई शुरू तय समय में शिकायतों का निवारण नही तो करवाई को रहे तैयार

आम लोगों की समस्याओं के निपटान के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। मुख्यमंत्री की तरफ से ये सेवा शुरू करने के बाद ही चेतावनी के रूप में बता दिया गया था की अगर इसमें लापरवाही हुई तो किसी को छोड़ा नहीं जायेगा फिर अफसर छोटा हो या बड़ा। अब इस हेल्पलाइन में आ रही शिकायतों को लेकर अधिकारियों की लापरवाही पर कार्रवाई शुरू हो गई है.

हिमाचल सरकार ने पहली कार्रवाई करते हुए एचआरटीसी करसोग के क्षेत्रीय प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है. दरअसल करसोग क्षेत्र में तत्तापानी-16 मील एचआरटीसी बस सेवा कुछ समय से बंद थी. इसकी शिकायत एक स्थानीय व्यक्ति ने सीएम हेल्पलाइन नंबर 1100 में की थी. आरएम को इस शिकयत का निपटारा 7 दिनों के अंदर करना था लेकिन अधिकारी ने कोताही बरतते हुए शिकायत का न तो निपटारा किया और न ही उसकी जांच की.हालंकि अब इस शिकायत का निपटारा हो चूका है लेकिन अधिकारी पर करवाई तय है।

प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. उससे पूछा गया है कि शिकायत निपटान में लापरवाही क्यों बरती गई है? एमडी एचआरटीसी युनूस ने न्यूज 18 को बताया कि फिलहाल इस शिकायत का निपटारा कर दिया गया है और बस सेवा शुरू हो गई है.

शिकायतकर्ता भी कार्रवाई से संतुष्ट है. इस आधार पर अब पंचायती राज विभाग ने भी खंड स्तर के अधिकारियों से 18 शिकायतों को लेकर एक नोटिस के माध्यम से 3 दिन में जवाब मांगा है ये जवाब असंतुष्टता की वजह से मांगा गया है ।हजारों शिकायतों का निवारण अब तक किया जा चुका है लेकिन अभी तक जिन शिकायतकर्ता की शिकायत का निवारण नहीं हुआ है उस पर जयराम सरकार सख्त है जिसके बाद से छोटे बड़े सभी अफसरों में हड़कंम्प मचा हुआ है।

आपकी जानकारी के लिए हम बता दें की सीएम हेल्पलाइन में आने वाली शिकायतों का निपटारा गंभीरता से किया जा रहा है और टालमटोल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी ये खुद मुख्यमंत्री जी ने साफ़ कर दिया है. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन के तहत चार स्तरों पर शिकायत का निवारण होता है. जिसमें पहले स्तर पर उपमंडल स्तर के अधिकारियों को समस्याओं का समाधान करना होता है. अगर उनके दायरे में इसका निवारण नहीं हो सकता तो वह शिकायत जिला स्तर, फिर एचओडी लेवल और अंत में सचिव स्तर पर जाती है.

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