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अब नजदीक से मजा ले सकेंगे शिमला की सुंदरता, रोपवे का खाका तैयार जयराम सरकार का पर्यटन की दृष्टि से बड़ा कदम

प्रदेश के विकास के लिए जयराम सरकार काफी तेज़ी से कार्य कर रही है। पर्यटन की दृष्टि से हिमाचल बहुतं जल्दी बहुत आगे निकलने वाला है। पर्यटकों सहित लोगों का राजधानी शिमला की सुंदरता को नजदीक से निहारने का सपना जल्द साकार होने वाला है। राज्य सरकार की ओर से गठित रोपवे कॉरपोरेशन ने शिमला में रोपवे का जाला बिछाने का पूरा खाका खींच लिया है। इसका बजट केंद्रीय मंजूरी के बाद वित्त पोषण के लिए भेजा जाना है। 1015 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट इसके लिए तैयार किया है। शहर में 31 स्थानों पर शहरवासी और सैलानी रोपवे से जा सकेंगे।

रोपवे बनाने का काम तारादेवी मंदिर से शुरू होगा। इसका पहला रोपवे तारादेवी, आइएसबीटी, पुराना बस अड्डा, लिफ्ट से होते हुए छोटा शिमला तक जाएगा। वहीं दूसरा रोपवे आइएसबीटी से लिफ्ट होते हुए रिज मैदान, लक्कड़ बाजार, संजौली तक पहुंचेगा। इसी तरह तीसरा रोपवे पुराने बस अड्डे से खलीणी कुसुम्पटी, न्यू शिमला से होते ही पंथाघाटी तक पहुंचेगा। चौथा रोपवे आइएसबीटी से समरहिल होते हुए आसपास से पूरे क्षेत्रों को जोड़ेगा। पांचवां रोपवे आइएसबीटी से टूटीकंडी रामनगर के एरिया को कवर करेगा। इसका पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है। जिला प्रशासन के साथ मिलकर संयुक्त निरीक्षण भी कर लिया है। अब फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए प्रस्ताव भेजा जाना है। रोपवे कॉरपोरेशन के मुख्य महाप्रबंधक अजय शर्मा ने माना कि इसका प्रोजेक्ट तैयार है। दिल्ली में इसी मसले पर दो दिन तक बैठक चल रही है।

रोपवे बनने से शहर में न ही जाम का डर सताएगा और न ही ऑफिस में देरी से पहुंचने की चिंता। वर्तमान में शहर में सड़कों पर पीक आवर यानी सुबह और शाम के समय रोजाना जाम लगता है। इससे शहरवासियों को ऑफिस पहुंचने से लेकर शाम के समय घर जाने तक में जाम से जूझना पड़ता है।

शहर में रज्जू मार्ग का जाल बिछाने के लिए कॉरपोरेशन ने 1015 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसे वित्त पोषण किसी एजेंसी से करवाया जाना है। फिलहाल केंद्र सरकार के पास इसे भेजा गया है। केंद्र की हरी झंडी के बाद ही विश्व स्तरीय एजेंसी के पास इसका प्रस्ताव मंजूरी को भेजा जाना है।

कॉरपोरेशन ने पूरे प्रोजेक्ट में कहां-कहां सवारियां उठाने व उतारने का स्थल होगा, इसे तैयार कर लिया है। इसके लिए कितनी भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, इसका केस फॉरेस्ट क्लीयरेंस का बनाया जा रहा है। जिला प्रशासन, वन विभाग और अन्य विभागों के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण कर रिपोर्ट बना ली है।

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