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निर्माण भवन शिमला से होगी सड़कों की निगरानी,सड़क प्रबंधन प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए जयराम सरकार कर रही है अत्याधुनिक तकनीक का इस्तमाल एक क्लिक पर उपलब्ध होगा डाटा

हिमाचल प्रदेश की 33 हजार किलोमीटर सड़कों की निगरानी निर्माण भवन शिमला से होगी। इन सड़क मार्गों की वस्तुस्थिति का डाटा मशीन कार ने जुटाया है। रोड मेजरमेंट डाटा एक्विजिशन सिस्टम (रोमदास) से जुटाए गए इस डाटा में हिमाचल की किसी भी सड़क की मौके की स्थिति को राज्य सरकार एक क्लिक कर देख सकेगी।

अहम है कि सड़क प्रबंधन प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए जयराम सरकार ने अत्याधुनिक तकनीक वाली दो कारें खरीदी हैं। इस रोमदास कार से सड़क मार्गों की वस्तुस्थिति सिस्टम में अपलोड हो जाएगी। इस सिस्टम से हिमाचल प्रदेश की 33 हजार किलोमीटर सड़कों की ऑफिस में बैठकर वस्तुस्थिति का पता लगेगा। इस आधार पर सड़क मार्गों को बजट अलॉट किया जाएगा। प्रदेश के सड़क मार्गों की निगरानी के लिए डेढ़ करोड़ की कार हिमाचल पहुंच चुकी है।

अत्याधुनिक तकनीक की स्कॉर्पियो कार सड़क मार्गों की वस्तुस्थिति कैद कर रही है। महाराष्ट्र और कर्नाटक की तकनीक से प्रभावित होकर जयराम सरकार ने सड़क मार्गों की मैपिंग के लिए ये दो आधुनिक दो कारें खरीदी हैं। अहम है कि इन कारों में रोड मेजरमेंट डाटा एक्विजिशन सिस्टम (रोमदास) स्थापित है। इस सिस्टम में सड़क मार्गों के गड्ढे, नालियां, मोड़ और टायरिंग की परत का लेखा-जोखा कैद हो जाएगा। इसके अलावा सड़क मार्गों के ट्रैफिक लोड और निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी सिस्टम में अपलोड हो जाएगी। केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की इस जादुई कार को हिमाचल सरकार ने सड़क मार्ग पर उतार दिया है। मंडी जोन में भेजी गई रोमदास कार धर्मशाला जोन को जोड़कर डाटा एकत्रित कर रही है। इसके अलावा शिमला में तैनात दूसरी कार हमीरपुर जोन के सड़क मार्गों की पैमाइश करने में जुटी है।

रोड मैनेजमेंट सिस्टम (आरएमएस) में एक बार ही सभी सड़कों का डाटा नवीनतम उपकरणों के माध्यम से एकत्रित किया जाएगा। इस आधार पर माउस के एक क्लिक पर हिमाचल की सड़कों का खाका कम्प्यूटर में दिखाई देगा। इसमें सड़क किनारे बिजली के खंभे, खतरनाक पेड़ इत्यादि, जिनसे टै्रफिक संचालन में बाधा आ रही है, उनका भी पता चल पाएगा। इसके अलावा चिन्हित ब्लैक स्पॉट भी स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। कैंची मोड़, अंधे मोड़ व चिन्हित ब्लैक स्पॉट को सुधारने के लिए फील्ड कर्मचारी को सड़क के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यही नहीं, सड़क की ज्योमैट्रिक पैरामीटर कम्प्यूटर पर ही उपलब्ध रहेंगे। इस तकनीक को अपनाने में विभाग की रख-रखाव प्रणाली में भी सुधार आएगा। एचपीआरआईडीसी स्टेट रोड प्रोजेक्ट के माध्यम से पांच हजार किलोमीटर सड़कों का डाटा एकत्रित किया जा चुका है।

शेष डाटा एक वर्ष में फील्ड इंजीनियरों द्वारा स्वयं एकत्रित किया जाएगा। यह डाटा के वार्षिक विश्लेषण के बाद सड़कों की अपग्रेडेशन की प्राथमिकता निर्धारित करने तथा वार्षिक रखरखाव योजना का निर्धारण करने में सहायक होगा। इन वाहनों में रोमदास प्रणाली स्थापित करने के लिए विभिन्न सड़कों की दशा तथा डाटा को अत्याधिक शुद्धता से वाहन की गति पर एकत्रित किया जाता है। इन वाहनों द्वारा एकत्रित डाटा को सड़क रख-रखाव प्रबंधन प्रणाली के एचडीएम-चार सॉफ्टवेयर में संशोधित और विश्लेषित किया जाता है।

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