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EXIT POLL : एग्जिट पोल हो सकते हैं गलत साबित इसलिए मची है विरोधी पार्टी में खलबली ?क्या इसलिए अभी से EVM को लेकर सवाल खड़े किये जा रहे हैं ?

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले सामने आए तमाम एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी दिल्ली में फिर से सरकार बना सकती है। हालांकि भाजपा द्वारा चुनाव प्रचार में की गई कड़ी मेहनता को देखकर और फिर उसके बाद कितना मतदान हुआ उसको देखते हुए लगता नहीं कि ये एग्जिट पोल सही जाने वाले हैं।

ऊपर से अभी से EVM मशीन को लेकर जिस तरह से आप पार्टी द्वारा सवाल उठाये जा रहे हैं वो एक तरह से आप पार्टी की बौखलाहट दिखा रहा है। जब एक तरफ सभी मीडिया वालों ने एग्जिट पोल में आप पार्टी की जीत दिखाई है तो फिर डर आखिर किस बात का ? जब भी एग्जिट पोल आते हैं तो वो अंत तक हुई वोटिंग पर आधारित नहीं होते हैं यही वजह है कि आप पार्टी दोपहर ३ बजे के बाद हुई बम्पर वोटिंग से परेशांन है।

दिल्ली में भाजपा के चुनावी प्रचार के लिए अमित शाह ने खुद मोर्चा संभाला था। उन्होंने जमकर जनसभाएं कीं, डोर-टू डोर कैंपेन भी किया। अमित शाह खुद लोगों के दरवाजों तक पहुंचे और बीजेपी के लिए वोट मांगे। कल आप लोगों ने लगभग हर न्यूज़चैनल पर हर तथाकथित महान विशेषज्ञ/विश्लेषक, महान एंकर/एडिटर को यह राग अलापते हुए सुना होगा कि इसबार पिछली बार की तुलना में मतदान बहुत कम हुआ है. इसका नुकसान भी BJP को हुआ होगा.

AAP PARTY के लिए इमेज नतीजे

यह भी जान लीजिए कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 40,20,931 मत मिले थे जबकि AAP को 2850524 मत मिले थे. दोनों के मध्य 1169668 मतों का अन्तर था. जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यह अन्तर 2014 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक बढ़कर 33.43 लाख मतों का हो गया था क्योंकि भाजपा को 4903109 और AAP को केवल 1559844. मत मिले थे.

चुनाव आयोग ने कुछ समय पहले, देश की सभी पार्टियों को आमंत्रित किया था कि वो चाहे तो अपने अपने विशेषग्यो को लेकर आये और EVM को सेट करके दिखाए और कई दिन तक यह आमंत्रण रखा।एक भी पार्टी नही आई क्योंकि सबको पता था कि वो पार्टियां अपनी हार छुपाने और जनता को बेवकूफ बनाने के लिए सिर्फ ये नेता भोंक सकते है पर बसकी इनके कुछ नही।अगर EVM टेम्पर/चोरी हो सकती है तो फिर तो AAP ने 2015/2013 के चुनाव में करवाई और 2008/2003/1998 में शीला दीक्षित/कांग्रेस ने करवाई ?

चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि जो EVM चोरी का AAP आरोप लगा है वो दो मशीन स्टैंडबाय एक्स्ट्रा मशीन थी जो इस्तेमाल ही नही हुई और उन्हें नियमानुसार वापस भेजा जा रहा था।कल रात और आज दिन भर चुनाव आयोग के अधिकारी वोट प्रतिशत चेक कर रहे थे और जैसे ही जांच पूरी हुई, आयोग ने आंकड़े जारी कर दिए हैं।

अब तो EVM के साथ VVPAT मशीन साथ मे होती है जहां वोट डालते ही पर्ची से वोट वेरीफाई हो जाती है तो फिर EVM सेट कैसे हो सकती है जिसे बाद में भी मिलान करने का प्रावधान है।हार का डर है आप पार्टी को इसलिए EVM पर रोना शुरू कर दिया है।

चुनाव आयोग ने मतदान प्रतिशत के आंकड़े किये जारी।

2015, में भाजपा की हार के 2 मुख्य कारण यह थे कि मोदी सरकार बने केवल 8 माह हुए थे. गरीब और लोकहित की कोई योजना प्रारम्भ या लागू होना तो दूर, तक तबतक ऐसी किसी योजना की घोषणा भी नहीं हुई थी. इसके विपरीत गरीब की थाली की अनिवार्य वस्तु दालों के दाम आसमान छूने लगे थे और अन्तरराष्ट्रीय मूल्यों में कमी के बावजूद डीज़ल पेट्रोल को सरकार सस्ता नहीं कर रही है, इस बात को लेकर मोदी समर्थकों में भी रोष था. जबकि केजरीवाल ऐसी किसी आकांक्षा पूर्ति के दायित्व की जवाबदेही से पूर्णतः मुक्त होकर लोकलुभावन वायदों की भरमार के साथ मैदान में उतरा था. 49 दिनों की उसकी सरकार में बिजली पानी की हरामखोरी की उसकी नीति उसके उलूल जलूल वायदों को विश्वसनीयता प्रदान कर रही थी. अतः उसको सफलता मिली थी.

AAP PARTY के लिए इमेज नतीजे

लेकिन इसबार भाजपा जब मैदान में उतरी तो उसकी झोली प्रधानमंत्री आवास योजना, 10 करोड़ से अधिक शौचालय निर्माण एवं उज्ज्वला सौभाग्य आयुष्मान, मुद्रा योजना, 12 रुपये प्रीमियम वाले 2 लाख के बीमा, किसान सम्मान निधि सरीखी 50 से अधिक ऐसी योजनाओं के सफ़लतापूर्वक संचालन की उन उपलब्धियों से भरी हुई थी, जिनसे करोड़ों गरीबों को लाभ मिला है. 2020 मैं दोबारा सत्तारूढ़ होने के पश्चात उसके द्वारा किए गए कार्य एवं फैसलो ने इतिहास रचा है, जबकि इसके विपरीत खुद केजरीवाल सरकार के दस्तावेज ही चीख चीख कर यह बता रहे हैं कि 5 साल में उसने अपना एक भी वायदा पूरा नहीं किया है, सिवाय पानी की हरामखोरी की नीति जारी रखने के.इसलिए जनता इसबार पुनः उसे प्रचंड बहुमत से सत्ता सौंपेगी, यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है।

अन्त में उल्लेख उन नवीन पटनायक का जिनका उदाहरण देकर केजरीवाल यह राग आलाप रहा था कि उड़ीसा में भी जनता ने राज्य और केन्द्र के लिए अलग अलग मतदान किया. अतः केजरीवाल को याद दिलाना चाहूंगा कि उड़ीसा की जनता भलीभाँति जानती थी कि नवीन पटनायक प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे लेकिन उसने नवीन बाबू को 12 और भाजपा को 8 लोकसभा की सीटों पर जिताया था. केजरीवाल की तरह लोकसभा चुनाव में नवीन बाबू का सूपड़ा साफ नहीं किया था.

हालांकि दिल्ली चुनाव के नतीजे 11 फरवरी को आएंगे, और तभी साफ हो पाएगा कि सरकार किसकी बनेगी और किसको कितना वोट शेयर मिला। भाजपा नेताओं की तरफ से भी दावा किया जा रहा है कि दिल्ली में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। इसको लेकर दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने अपने एक ट्वीट में लिखा कि, ’11 फरवरी को मतदान के नतीजे आने के बाद सभी एग्जिट पोल गलत साबित होंगे। बीजेपी अकेले दिल्ली में 48 सीटें लाने जा रही है। ईवीएम को दोष देने का अभी से बहाना न ढूंढें।’

वहीं अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़े भाजपा प्रत्याशी सुनील यादव ने अपने ट्वीट में लिखा, “श्री नरेंद्र मोदी जी,श्री अमित शाह जी,श्री जेपी नड्डा जी एवं संगठन ने मुझपर भरोसा किया इसके लिए उनका आभार। केजरीवाल जी अपना चुनाव हारेंगे व नई दिल्ली में भाजपा की जीत निश्चित है।अगर यह नहीं हो पाया तो मैं कभी चुनाव नहीं लड़ूँगा व जीवनभर केवल संगठन का ही काम करूँगा। भारत माता की जय।”

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