राजनीती राज्यों से

ना कांग्रेस को विकास पसंद है ना कांग्रेसी विकास होता देख सकते हैं ?रिलायंस जियो और बिजली विभाग में हुए इस करार में क्या गलत है फैसला खबर पढ़कर खुद करें

आज हिमाचल में टेलीकॉम कंपनियों की वजह से प्रदेश में नेटवर्क की अच्छी कवरेज हो चुकी है। सभी टेलीकॉम कंपनियों में रिलायंस जियो ने जिस तरह से प्रदेश में काम किया है वो तारीफ के लायक है। हालाँकि दूसरी टेलीकॉम जैसे एयरटेल भी अपने अच्छे नेटवर्क के लिए काम कर रही है। जनजातीय क्षेत्र पांगी हो या फिर लाहौल स्पीति आज वहां के लोगों की जिंदगी में सकून लेकर जियो आया है। आज चम्बा की ऊँची ऊँची पहाड़ी पर बसे हुए गावों के लोग भी जियो के नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।

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लाहौल में लगा जियो टावर

अब रिलायंस जियो हिमाचल में फाइबर ले जाने का कार्य कर रही है। फाइबर लोगों के घर घर तक पहुंचाकर रिलांयस कंपनी पूरी तरह से लोगों को हाईस्पीड इंटरनेट के साथ साथ केवल टीवी जैसी सुविधा भी देने की तैयारी कर रही है। फाइबर को घर-घर तक लेकर जाना इतना आसान कार्य नहीं है फिर भी कंपनी की तरफ से कार्य किया जा रहा है। रिलायंस कंपनी ने हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के साथ करार किया है जिसके तहत बिजली बोर्ड को भी करोड़ों का लाभ होगा बिना कुछ खर्च किये।

बिजली बोर्ड ने रिलायंस कंपनी को हिमाचल में अपने 25000 पोल यानी खंभे किराये पर दे दिए हैं। रिलायंस कंपनी जियो की फाइबर अब जमीन के बजाय बिजली पोल पर ही बिछाकर लोगों को मोबाइल नेटवर्क देगी।19 सितंबर, 2019 को बिजली बोर्ड की बीओडी में रिलायंस कंपनी को हिमाचल के 25000 पोल किराये पर देने का निर्णय लिया गया। 8.7 करोड़ कंपनी ने एडवांस के तौर पर बोर्ड को दे दिए हैं। कंपनी ने पांच साल के लिए एग्रीमेंट किया है।

अब कोई समझाये की इसमें गलत क्या है ? कई राज्यों में बहुत पहले से ये सब किया गया है किया जा रहा है। इससे उल्टा बिजली विभाग को करोड़ों का फायदा हो रहा है। लेकिन विपक्ष कांग्रेस को इसमें भी राजनीती करनी है यही वजह है कांग्रेस अब इसका भी विरोध कर रही है क्योंकि कांग्रेस कभी चाहती ही नहीं है की प्रदेश तरक्की की राह पर आगे बढ़े। लेकिन आज प्रदेश में सबसे ज्यादा किसी टेलीकॉम कम्पनी ने लोगों को जगह जगह नेटवर्क की सुविधा दी है वो सिर्फ जियो है और पुरे देश में सबसे पहले फ्री और बाद में सस्ती सर्विस देकर रिलायंस जियो ने दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को भी रेट कम करने पर मजबूर किया था।

दूसरी तरफ बिजली बोर्ड के चीफ मैटेरियल मैनेजमेंट अधिकारी मनोज कुमार उप्रेती ने बताया कि बोर्ड और जनहित में पारदर्शी तरीके से 25000 पोल रिलायंस कंपनी को किराये पर देने का फैसला लिया गया है। जन सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है।अब आप खुद तय करें इसमें गलत क्या है ? आखिर क्यों हर बात का कांग्रेस विरोध करती है ?

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