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ब्रेकिंग : जानिए कैसे फिटकरी का चमत्कारी प्रयोग कोरोना वायरस से रखेगा आपसे कोसो दूर, बनाया गया नया फार्मूला !

 

चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस दुनियाभर के लिए अब सिरदर्द बन चुका है। इस वायरस से विश्वभर में लगभग 20 हजार लोगों ने अपनी जान गवां दी है। जिसके बाद डॉक्टर्स लोगों को लगातार साबुन या सैनिटाइजर से अपने हाथ धोने की सलाह दे रहे हैं। कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति जब खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैल जाते हैं। इन्हीं छोटे-छोटे कणों की वजह से कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। व्यक्ति के छींकने पर एक वक्त पर थूक के 3,000 से अधिक कण यानी ड्रॉपलेट्स शरीर से बाहर आते हैं। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति के नजदीक जाने पर ये कण सांस के रास्ते दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।

Corona Virus Protection

जो मनुष्य की काया ‘फिट’ करे उसे ‘फिटकरी’ कहते हैं यह लाल व सफेद दो प्रकार की होती है। फिटकरी एक प्रकार का खनिज है जो प्राकृतिक रूप में पत्थर की शक्ल में मिलता है। इस पत्थर को एल्युनाइट कहते हैं। इससे परिष्कृत फिटकरी तैयार की जाती है। खड़े नमक की तरह दिखने वाली फिटकरी सेंधा नमक की तरह चट्टानों से मिलती है। इसका रासायनिक नाम है पोटेशियम एल्युमिनियम सल्फेट। पोटाश एलम का इस्तेमाल रक्त में थक्का बनाने के लिए किया जाता है। इसीलिए दाढ़ी बनाने के बाद इसे चेहरे पर रगड़ते हैं ताकि छिले-कटे भाग ठीक हो जाएं। इसके कई तरह के औषधीय उपयोग हैं।

फिटकरी एक रंगहीन रसायनिक पदार्थ है, जो एक किस्टल की तरह होती है। इसका रासायनिक नाम पोटैशियम एल्यूमीनियम सल्फेट है। इसे अंग्रेजी में एलम कहा जाता है। सामान्य से दिखने वाले इस पदार्थ का महत्व चिकित्सा के क्षेत्र में अहम है। आगे हम बता रहे हैं कि फिटकरी के कौन-कौन से प्रकार उपलब्ध हैं। सालों से हम के सब के घरों में फिटकरी का इस्तेमाल होता आ रहा है। रसायन विज्ञान में इसे पोटैशियम एल्युमिनियम सल्फेट के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में भी फिटकरी के बहुत से औषधीय गुण बताए गए हैं।

आईआईटी बीएचयू के जैव रासायनिक अभियांत्रिकी स्कूल ने फिटकरी से जो हैंड सेनेटाइजर तैयार किया है, वह उच्च गुणवत्ता वाला है। प्रो. विशाल मिश्र और शोधार्थियों की टीम ने इसे आम लोगों के लिए बनाया है। बाजार में एक तो सेनेटाइजर की कमी है, वहीं इसकी कीमत भी ज्यादा होती है। इस वजह से अधिकांश लोग इसका उपयोग नहीं कर पाते। इस समय कोरोना (कोविड-19) को हराने के लिए सभी लोग अपने-अपने स्तर से प्रयास कर रहें हैं। ऐसे में बिना पानी बर्बाद किए जीवाणुओं को मारने का सबसे बेहतर विकल्प अल्कोहल युक्त सेनेटाइजर ही है।

ऐसे बनाया सेनेटाइजर 
आईआईटी बीएचयू जैव रासायनिक अभियांत्रिकी स्कूल के प्रो. विशाल मिश्र ने बताया कि फिटकरी वाला सेनेटाइजर बनाने में फिटकरी का पाउडर, गुलाब जल और अब्सोल्यूट एल्कोहल के साथ थोड़ी मात्रा में पानी मिलाने की जरूरत होती है। इससे तैयार सेनेटाइजर हाथ में लगाने पर जीवाणुओं को मार देता है। हवा के सम्पर्क में आने पर यह उड़ जाता है, इसलिए हाथ चिपचिपा भी नहीं रहता है। गुलाब जल की खुशबू बनी रहती है। एक लीटर फिटकरी वाला सेनेटाइजर बनाने में करीब 430 रुपये का खर्च पड़ता है। बाजार में मिलने वाला सेनेटाइजर 12 से 18 सौ रुपये लीटर पड़ता है।

डॉक्टर भी मानते हैं फिटकरी को गुणकारी
फोर्टिस अस्पताल में गाइनी विभाग की प्रमुख डॉ. सुनिता मित्तल का कहना है कि अगर घर या बाहर साबुन या सैनिटाइजर उपलब्ध नहीं हो तो एक फिटकरी का टुकड़ा भी काम आ सकता है. फिटकरी में एल्मुनियम सल्फेट होता है जो पानी को बिलकुल साफ कर देता है. अगर पानी में एक टुकड़ा फिटकरी डालकर उससे हाथ धोते हैं तो बीमारियों से बचा जा सकता है. कुल मिलाकर फिटकरी घुले पानी से हाथ धोना सादे पाने से कहीं ज्यादा प्रभावी है.

दोस्तों, फिटकरी एक सुलभ एवं सस्ता पदार्थ है, आसानी से मिल जायेगा, इसका नियमित प्रयोग करने में कोई बुराई नहीं है, अभी ये और शोध का विषय है की फिटकरी पूरी तरह किन किन बीमारियों से दूर रखती है, पर फ़िलहाल अगर अपने घर में नियमित प्रोग किया जाये तो इसमें कम से कम कोई हानि नहीं !

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