राजनीती

खुलासा – हदें पार कर रहे तबलीगी जमात के कोरोना संदिग्‍ध,आया एक और ऐसा सच सामने जिसने हिलाकर रख दिया पुरे देश को

दिल्‍ली के निजामुद्दीन मरकज (Nizamuddin Markaz) से तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के कोरोना संक्रमण संदिग्‍धों (Coronavirus) को ले जाकर तुगलकाबाद में क्‍वारंटीन सेंटर (पृथक केंद्र) में रखा गया है. पहले ये मुस्लिम समुदाय के लोग निजामुद्दीन मरकज को छोड़कर जाने को तैयार नहीं थे और अब ये लोग क्‍वारंटीन सेंटर में उनका इलाज कर रहे डॉक्‍टरों और अन्‍य कर्मचारियों को भी परेशान कर रहे हैं. उत्‍तर रेलवे के सीपीआरओ दीपक कुमार के मुताबिक ये सभी लोग पृथक केंद्र में जगह-जगह थूक रहे हैं. इसके साथ ही ये डॉक्‍टरों और कर्मचारियों पर भी थूक रहे हैं. बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमित या संदिग्‍ध लोगों के थूकने से इसके संक्रमण के प्रसार का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.ये लोग अब कोरोना जिहाद पर उतर चुके हैं ताकि दूसरे समुदाय के लोगों में भी कोरोना फैलाया जा सके।

खराब बर्ताव कर रहे हैं लोग

सीपीआरओ के मुताबिक ये लोग बुधवार सुबह से ही खराब बर्ताव कर रहे हैं. ये सभी खाने-पीने की अनावश्‍यक चीजों की मांग कर रहे हैं. सीपीआरओ दीपक कुमार के अनुसार ये सभी लोग उनके इलाज में जुटे डॉक्‍टरों और उनकी देखरेख कर रहे कर्मचारियों के साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं. वे सभी क्‍वारंटीन सेंटर में जगह-जगह थूक रहे हैं. वह रोक के बावजूद हॉस्‍टल में घूमने लगते हैं.

सड़कों पर भी थूक रहे थे

तबलीगी जमात के इन 167 कोरोना संदिग्‍धों को मंगलवार रात को 5 बसों से निजामुद्दीन मरकज से दिल्‍ली के तुगलकाबाद स्थित क्‍वारंटीन सेंटर ले जाया गया है. इनमें से 97 लोगों को डीजल शेड ट्रेनिंग हॉस्‍टल के क्‍वारंटीन सेंटर और 70 को आरपीएफ बैरक क्‍वारंटीन सेंटर में रखा गया है. बता दें कि ये सभी निजामुद्दीन मरकज से क्‍वारंटीन सेंटर ले जाए जाने के दौरान सड़कों पर भी थूक रहे थे. इन्‍हें थूकने से रोकने के लिए बसों के शीशे भी बंद करने पड़े थे.

संक्रमण के मामले बढ़ने में मरकज प्रमुख वजह,लॉक डाउन करके मोदी सरकार ने जो कोरोना के खिलाफ बड़ी लड़ाई काफी हद तक जीत ली थी अब इन मुस्लिम समुदाय के लोगों की वजह पुरे देश में हालत खराब हो चुकी है –

स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस के संक्रमण के 386 नये मामलों की पुष्टि और इससे तीन लोगों की मौत होने की जानकारी देते हुए बुधवार को बताया कि कोविड-19 के मामलों में वृद्धि राष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण फैलने की दर को नहीं दर्शाती, बल्कि इस बढ़ोतरी में निजामुद्दीन (पश्चिम) में हुआ एक आयोजन प्रमुख वजह रहा. बता दें कि दिल्ली स्थित निजामुद्दीन इलाके में एक से 15 मार्च तक हुये तबलीगी जमात के एक आयोजन में हिस्सा लेने वालों में से कई लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है.तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होकर घर लौटे अधिकांश लोगों में कोरोना संक्रमण पॉजिटिव पाया गया है. ऐसे मामले देश के अलग-अलग राज्‍यों से सामने आ रहे हैं. राज्‍यों की पुलिस ऐसे लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है.

तब्लीगी जमात के सदस्यों ने ही की थी आतंकी संगठन हरकत उल मुजाहिदीन की स्थापना

इस्लामी मिशनरियों के वैश्विक संगठन तब्लीगी जमात का पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन हरकत उल मुजाहिदीन (एचयूएम) से जुड़ाव का लंबा इतिहास रहा है। भारतीय जांचकर्ताओं और पाकिस्तानी विश्लेषकों के मुताबिक हरकत उल मुजाहिदीन के मूल संस्थापक तब्लीगी जमात के सदस्य थे।हरकत उल जिहाद अल इस्लामी (हूजी) से टूटकर 1985 में बने हरकत उल मुजाहिदीन ने अफगानिस्तान से तत्कालीन सोवियत संघ गठबंधन की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए पाकिस्तान समर्थक जिहाद में भी हिस्सा लिया था।

तब्लीगियों ने आतंकी शिविरों में ली ट्रेनिंग

खुफिया अनुमानों के मुताबिक, छह हजार से ज्यादा तब्लीगियों को पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों में प्रशिक्षित किया गया था। अफगानिस्तान में सोवियत संघ की हार के बाद हरकत उल मुजाहिदीन और हूजी कश्मीर में सक्रिय हो गए थे और उन्होंने सैकड़ों बेगुनाह नागरिकों की हत्या की। हरकत उल मुजाहिदीन के सदस्य बाद में मसूद अजहर के नेतृत्व में बने आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद में शामिल हो गए। गोधरा में कारसेवकों को जिंदा जलाने में तब्लीगी जमात पर संदेह जताया गया था।भारतीय खुफिया अधिकारी और सुरक्षा विशेषज्ञ बी. रमन ने अपने एक लेख में लिखा था कि तब्लीगी जमात की पाकिस्तान और बांग्लादेश स्थित शाखाओं के हरकत उल मुजाहिदीन, हरकत उल जिहाद अल इस्लामी, लश्कर ए तैयबा और जैश ए मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के साथ जुड़ाव को लेकर समय-समय ध्यान जाता रहा था।

स्लीपर सेल तैयार करने का संदेह

रमन ने इस बात का खास तौर पर उल्लेख किया था कि हरकत उल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के सदस्य खुद को तब्लीगी जमात का प्रचारक दर्शाकर वीजा हासिल करते थे और विदेश जाकर पाकिस्तान में आतंकी प्रशिक्षण के लिए मुस्लिम युवाओं की भर्ती करते थे। जमात ने चेचेन्या, रूस के दागिस्तान क्षेत्र, सोमालिया और कुछ अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में समर्थक तैयार कर लिए थे। इन सभी देशों की खुफिया एजेंसियों को संदेह था कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन अलग-अलग देशों के मुस्लिम समुदायों में स्लीपर सेल तैयार करने के लिए इन प्रचारकों का इस्तेमाल कर रहे थे।

अमेरिकी जांच के दायरे में आई थी तब्लीगी जमात

तब्लीगी जमात कभी अमेरिकी जांच के दायरे में भी आई थी। अमेरिका में आतंकी हमले के बाद संघीय जांचकर्ताओं ने तब्लीगी जमात में रुचि दिखाई थी। इस पर अलकायदा में भर्ती के लिए जमीन तैयार करने का संदेह था।न्यूयॉर्क टाइम्स में 14 जुलाई, 2003 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एफबीआइ की अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद टीम के उपप्रमुख माइकल जे. हेइम्बच का कहा, ‘हमने अमेरिका में तब्लीगी जमात की उल्लेखनीय मौजूदगी पाई है और हमने यह भी पाया है कि अलकायदा भर्ती के लिए इनका इस्तेमाल करता है।’ हालांकि न तो तब्लीगी जमात और न ही इसका कोई सदस्य किसी अपराध या आतंकवाद का समर्थन करने के मामले में आरोपित किया गया है।

संगठन को लेकर सचेत रहने को कहा

इसके बावजूद अमेरिकी अधिकारी ने इस संगठन को लेकर सचेत रहने को कहा। जबकि जमात ने अमेरिकी सरकार के उस तर्क को पूरी तरह अनुचित करार दिया कि यह संगठन आतंकियों की भर्ती के लिए जमीन तैयार करता है। तब्लीगी जमात के नार्थ अमेरिकन लीडरशिप काउंसिल के नेता अब्दुल रहमान खान ने कहा, ‘यह बहुत गंभीर आरोप है जो पूरी तरह झूठ है।’ वहीं, विकिलीक्स दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिका द्वारा हिरासत में लिए गए 9/11 हमले के कुछ अलकायदा संदिग्ध कई साल पहले निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात परिसर में रुके थे।

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी तब्लीगी जमात पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि यह दुनिया की सबसे खतरनाक जमात है। यह मुसलमानों का एक ऐसा खतरनाक समूह है जो पूरी दुनिया में इस्लाम के प्रचार के नाम पर मुसलमान युवाओं को कट्टरपंथी बनाता है।

वसीम रिजवी ने कहा कि यह जमात पूरी दुनिया में फैली है। चाहे अबू बकर बगदादी हो या ओसामा बिन लादेन, ये सब तब्लीगी जमात के मददगार थे। तब्लीगी जमात को दुनिया के कट्टरपंथी और आतंकी मुल्ला ही चला रहे हैं। यह मुस्लिम युवाओं को ऐसा कट्टरपंथी बनाते हैं कि अगर अल्लाह की राह में उन्हें कुर्बानी भी देनी पड़ जाए तो पीछे न हटें। युवाओं को यह भी समझाते हैं की दुनिया में जो अल्लाह और कुरान शरीफ को नहीं मानते हैं, वे सब काफिर हैं। काफिर अल्लाह के दुश्मन हैं।

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के मुताबिक आतंकी मुल्ला तो युवाओं को यहां तक समझाते हैं कि काफिरों को मारना सवाब है और कोई शख्स अगर एक काफिर को भी मार देता है तो उसको सौ हज का सवाब मिलेगा। रिजवी कहते हैं कि इसलिए इस तब्लीगी जमात को दुनिया की सबसे खतरनाक जमात माना जाता है। ऐसी खतरनाक तब्लीगी जमात को खत्म करने की जरूरत है, क्योंकि हर मुस्लिम आतंकी संगठन की यह बुनियादी ताकत है। जमात ऐसे संगठनों के लिए वे काम करता है जो आतंकी संगठन खुल कर नही कर सकते। हिंदुस्तान में तो जरूर इस जमात पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

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