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Himachal News – बद्दी से निकलेगा कोरोना वायरस के नाश का बाण,हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का उत्पादन बड़े पैमाने पर शुरू

कोरोना वायरस से लड़ रही दुनिया को जिस एक दवा में उम्मीद की किरण दिखी है, हिमाचल के उद्योगों ने उसका निर्माण बडे़ पैमाने पर शुरू कर दिया है। मलेरिया के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा को कोविड-19 के खिलाफ गेमचेंजर का दर्जा दिया जा रहा है। हिमाचल में करीब 40 दवा कंपनियों के पास इस दवा निर्माण का लाइसेंस है, जिनमें से बद्दी स्थित जायडस कैडिला फार्मा ने तो इसका बडे़ पैमाने पर निर्माण भी शुरू कर दिया है। यह कंपनी घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ अमरीका सहित अन्य देशों को भी इसका निर्यात करेगी। यही नहीं, कोरोना महामारी से उपजे सकंट के बीच हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए राज्य दवा नियंत्रण प्राधिकरण ने ऐसे तमाम उद्योगों को खंगालना शुरू कर दिया है। पड़ताल में देखा जा रहा है कि लाइसेंसशुदा कंपनीयों में से कितनी में इसका निर्माण हो रहा है और फिलवक्त कितना स्टॉक उपलब्ध है। आलम यह है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के लिए दुनिया भारत के आगे हाथ फैलाए खड़ी है, क्योंकि इसकी पूरी सप्लाई का 70 फीसदी हमारे ही देश में बनता है। हाल ही में अमरकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस दवा की सप्लाई के लिए भारत से आग्रह किया था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने दवा के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। उल्लेखनीय है कि बीबीएन को एशिया के फार्मा हब के तौर पर जाना जाता है, देश में मिलने वाली हर तीसरी दवा का निर्माण यहीं होता है। प्रदेश में करीब 700 दवा उद्योग स्थापित हैं, जिनमें से 200 से ज्यादा ईयू अप्रूवड, 200 से ज्यादा डब्ल्यूएचओ व जीएमपी अप्रूवड और कई उद्योग यूएसएफडीए अप्रूवड हैं। इनमें केडिला, पैनेशिया, वैलेस, मैकलायडस व मोरपेन प्रमुख हैं। कैडिला ने तो इस दवा का निर्माण भी शुरू कर दिया है। काबिलेजिक्र है कि भारत मलेरिया के इलाज में उपयोग होने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा का सबसे बड़ा उत्पादक है। इस दवा को अब कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में पासा पलटने वाला माना जा रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति इसी दवा की आक्रामक तरीके से मांग कर रहे हैं।

डिला में उत्पादन शुरू

राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाहा ने बताया कि कैडिला ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का निर्माण शुरू कर दिया है। हिमाचल में विदेशी नियामकों से अप्रूवड कई दवा कंपनियां हैं। आगामी दिनों में यहां भी इस दवा का उत्पादन बढ़ेगा।

40 उद्योगों के पास लाइसेंस

दवा उपनियंत्रक मुनीष कपूर ने बताया कि प्रदेश में लगभग 40 उद्योगों के पास हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन निर्माण का लाइसेंस है। प्राधिकरण जानकारी जुटा रहा है कि इनमें से कितनी कंपनियां उत्पादन कर रही हैं और कितना स्टॉक पड़ा है। कई कंपनियां इसके लाइसेंस के लिए संर्पक कर रही हैं, लेकिन स्टेबिलिटी डाटा सहित अन्य मानकों को जांचने के बाद ही इसकी मंजूरी दी जा सकती है।

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