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सबसे छोटे जिला का बड़ा कमाल,राधा स्वामी हॉस्पिटल भोटा ने छह कोरोना मरीजों को दी नई जिंदगी

कोरोना से जंग लड़ रहे हिमाचल के हमीरपुर जिले के भोटा स्थित राधा स्वामी चेरिटेबल अस्पताल ने रविवार को एक नया अध्याय बना दिया। यहां से कोविड-19 से संक्रमित छठा मरीज भी पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपने घर लौट गया। प्रदेश के इस सबसे छोटे जिले का नाम कोरोना के इतिहास के पन्नों पर बड़े अक्षरों से लिखा जाएगा, क्योंकि इस जिले के काबिल डाक्टरों और मरीजों के उपचार में लगे स्टाफ ने न केवल अपने जिले के दो मरीजों को पूर्ण रूप से स्वस्थ करके यहां भिजवाया, बल्कि पड़ोसी जिले ऊना के भी चार संक्रमित मरीजों की कोरोना के खिलाफ जंग जितवाई।

बता दें कि 11 अप्रैल को भोटा स्थित राधा स्वामी चेरिटेबल अस्पताल में जिस वक्त ऊना जिला के दो कोरोना संक्रमित मरीजों को लाया गया था, तो पूरे जिले में न केवल दहशत का माहौल बन गया था, बल्कि एक सन्नाटा पसर गया था, क्योंकि यह जिला ग्रीन ज़ोन में चल रहा था। उसके बाद 13 अप्रैल को एक और मरीज ऊना से ही यहां लाया गया। बाहरी मरीजों को यहां लाने से छिड़ी चर्चा अभी जिला में छिड़ी हुई थी कि 17 अप्रैल को हमीरपुर जिले के ही एक महिला समेत दो कोरोना संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई।

फिर क्या था पूरा जिला दहशत में आ गया। इसका एक बड़ा कारण यह भी था कि न तो इन दोनों संक्रमित मरीजों की कोई ट्रैवल हिस्ट्री था न ही इस बात का पता लग पा रहा था कि आखिर ये पॉजिटिव किसके संपर्क में आने से हुए। 18 अप्रैल को एक और मरीज कोरोना का ऊना जिला से लाया गया। खैर राधा स्वामी अस्पताल में डाक्टरों ने दिन-रात सेवा करके मरीजों को स्वस्थ किया। छह में से पांच मरीजों की 14 दिनों बाद आई रिपोर्ट्स दोनों बार ही नेगेटिव आई, लेकिन 11 अप्रैल को ऊना से जो मरीज यहां लाए गए थे, उनमें से एक की रिपोर्ट पहली बार तो नेगेटिव आई थी, लेकिन दूसरी बार फिर पॉजिटिव आई थी, जिसके चलते उसे एक सप्ताह और यहां रखा गया। रविवार को उसकी दोनों रिपोर्ट्स नेगेटिव आने से लोगों ने राहत की सांस ली।

80 योद्धाओं ने दिन-रात दी सेवाएं

हमीरपुर के जो दो कोरोना संक्रमित ठीक हुए हैं, उन्हें फिलहाल अणु स्थित विद्युत बोर्ड के गेस्ट हाउस में 14 दिन के लिए निगरानी में रखा गया है, जबकि ऊना के जो चारों मरीज हैं उन्हें उनके ही जिले में वापस भेजकर वहां क्वारंटाइन किया गया है। 14 दिनों बाद इन्हें होम क्वारंटाइन किया जाएगा। अच्छी बात यह भी रही कि जिला प्रशासन ने लोगों को जरूरी सामान घरद्वार पर पहुंचाकर उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. अनिल वर्मा को इस अस्पताल का भी नोडल अधिकारी बनाया गया है। लगभग 23 दिनों में यहां से सभी संक्रमित व्यक्तियों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। इनकी देखरेख में 80 कोरोना योद्धाओं की चार टीमों ने दिन-रात अपनी उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इनमें डाक्टर, स्टाफ नर्स, अन्य स्वास्थ्य कर्मी, सफाई व सुरक्षा कर्मियों से लेकर इन टीमों की परिवहन सेवा से जुड़े वाहन चालक इत्यादि शामिल हैं।

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