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हिमाचल के सभी विधायक कोविड फंड दे रहे अपना पूरा मूल वेतन,आप सभी का ये भी जानना जरूरी

हर चीज में पब्लिसटी चाहती है कांग्रेस और उनके नेता। हकीकत एक ये भी है जिसके बारे में भी सबको जानकारी होना जरूरी है। कोरोना के खिलाफ जंग में हिमाचल के सभी विधायक अपना पूरा मूल वेतन कोविड फंड में दे रहे हैं। सभी विधायक आगामी एक साल अपना पूरा वेतन कोविड फंड में देते रहेंगे। हालांकि 6 अप्रैल को वीडियो कान्फ्रैंसिंग से आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में एक सूत्रीय एजैंडे पर चर्चा के बाद निर्णय लिया गया कि कोरोना से जंग के लिए सभी संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, मंत्रियों व विधायकों के मूल वेतन में 30 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। विधायकों का मूल वेतन 55 हजार रुपए मासिक है। 30 प्रतिशत के हिसाब से लगभग 16 हजार रुपए कीकटौती बनती है, लेकिन हिमाचल के सभी विधायक अब 30 प्रतिशत मूल वेतन न कटवाकर पूरा वेतन दे रहे हैं।

दो सालों तक यह धनराशि राज्य सरकार के कंसोलिडेटिड फंड में जाएगी

उल्लेखनीय है कि विधायकों के कुल वेतन-भत्ते को मिलाकर 2लाख 8 हजार रुपए मासिक बनते हैं। केंद्र सरकार के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने भी विधायकों का मूल वेतन कोविड फंड में देने का निर्णय लिया। ऐसे मुश्किल वक्त में सभी विधायकों की यह सराहनीय पहल है। हालांकि प्रदेश में सबसे पहले ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने अपनी पूरी सैलरी कोविड फंड में देने का फैसला लिया था।

मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान विधायकों को मिलने वाली विधायक क्षेत्र विकास निधि की 1.75 करोड़ रुपए की धनराशि को भी आगामी दो सालों के लिए स्थगित किया गया है। दो सालों तक यह धनराशि राज्य सरकार के कंसोलिडेटिड फंड में जाएगी। नूरपुर विधायक राकेश पठानिया का कहना है कि हिमाचल के सभी विधायक अपना पूरा वेतन कोविड फंड में दे रहे हैं और अगले एक साल तक देते रहेंगे।

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