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मोदी सरकार की चीन को फिर से दो टूक- मतभेदों को शांति से सुलझाने का पक्षधर लेकिन संप्रभुता से कोई समझौता नहीं

भारत ने फिर से स्पष्ट कर दिया है कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं हो सकता है, चाहे परिस्थिति कुछ भी हो और सामने कोई भी हो। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है, लेकिन हालात के मुताबिक हर तरह की कार्रवाई को भी तैयार रहता है।

क्षेत्रीय अखंडता सर्वोच्च प्राथमिकता: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने वंदे भारत मिशन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी जिसमें चीन के साथ जारी विवाद पर सवालों की बौछार हो गई। इन सवालों पर मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम सीमाई इलाकों में शांति और सौहार्द का माहौल बनाए रखने की जरूरत अच्छी तरह समझते हैं। साथ ही हम बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने के पक्षधर हैं। हालांकि, जैसा कि प्रधानमंत्री ने कल (बुधवार को) कहा, हम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने को लेकर बेहद प्रतिबद्ध हैं।’

छह घंटे चली मेजर जनरल लेवल की मीटिंग

उन्होंने आगे कहा, ‘उम्मीद करते हैं कि चीन अपनी गतिविधियां अपनी सीमा के अंदर सीमित रखेगी।’ श्रीवास्तव ने बताया कि भारत और चीन के बीच संपर्क अभी टूटा नहीं है और अलग-अलग स्तर पर बातचीत जारी है। इसी के तहत, दोनों देशों के बीच गुरुवार को भी मेजर जनरल लेवल की मीटिंग हुई। पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध के शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता तलाशने के लिए दोनों पक्षों की यह मीटिंग छह घंटे तक चली। दोनों पक्ष बुधवार को भी मिले थे, लेकिन उस मीटिंग में किसी परिणाम तक नहीं पहुंचा जा सका था।

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