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कंगना अपने स्टेटमेंट पे कायम,भारतीय संस्कृति और और गौमाता पे अपने विचारों से उड़ाई छद्द्म उदरवाइदयों की धज्जियां !

Kangna with Sadguru Jaggi Vasudev

कंगना राणावत की ईशा फाउंडेशन के प्रमुख सधगुरु जग्गी वासुदेव के साथ हालिया बातचीत का मुद्दा जिसमे गाय और हिंदुत्व की संस्कृति पे चर्चा हुई थी, कई उदारवादियों के गले के नीचे नहीं उतरा है  !

कई लोगों ने कंगना राणावत को उनकी टिप्पणियों के लिए ट्रोल करना शुरू किया, पर कंगना अपने दिए वक्तव्य और स्टेटमेंट पर कायम है, और न ही उनको इस विषय पे कोई पश्चाताप हुआ ! कंगना एक राष्ट्रवादी अभिनेत्री और हिंदूवादी सोच रखने वाली अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है यही वजह है सेक्युलर और वामपंथी इस अभिनेत्री से खार खाते हैं !

मिड डे के साथ एक साक्षात्कार में, अपनी बातचीत के दौरान, कंगाना ने कहा था कि गायों को वास्तव में संरक्षित करने की जरूरत है, वह गायों की दयनीय स्थिति देख के दिल से पीड़ित होती थी। उदारवादियों के बारे में बोलते हुए, वह सदगुरु जग्गी वासुदेव के कथन से भी सहमत हुई से सहमत हुई कि हिंसा पर बहस करने वाले लोगों ने “भारत को असली स्वरुप और संस्कृति को न ही देखा है न ही समझा है. कंगना का मानना है की हमारे देश की पुरातन संस्कृति, उसके मूल्यों पे अधिकतर वो लोग टीका टिप्पणियां करते हैं जिनका जन्म शहरों में हुआ और जिनको भारत की असली संस्कृत्ति, गाँव की जीवन शैली और पुरातन अध्यतमिक मान्यताओं के बारे में कुछ भी अच्छे से मालूम नहीं है …अपनी बातों पे कायम रहते हुए कंगना कहती हैं कि “तथाकथित उदारवादी या लिबरल्स विश्व के व्यवसाइक दृष्टिकोण से भरे हुए हैं और उनमे संवेदनाओं की कमी है !

Kangna with Sadguru Jaggi Vasudev Ji

जब मिड डे ने कंगना से पूछा कि क्या वह गाय के बारे और लिंचिंग के बारे में क्या कहना चाहेंगी.. उन्होंने कहा….यदि कोई निश्चित धर्म गायों की पूजा करता है, तो आप गायों को मार नहीं सकते हैं। मैं शाकाहारी हूँ और मैं कच्चे मांस को इस तरह से नहीं देख सकती …और वो भी गाये …..कंगना ने कहा ये मेरी स्वंतररता है और निजी चुनाव है….और कोई मुझे अपने विकल्पों के लिए शर्मिंदा नहीं कर सकता है सकता है। अगर यह भारत के बहुसंख्यक लोगों के लिए भावनात्मक बात है, तो लोगों को इसके लिए मीडिया का एक वर्ग इसके खिलफ क्यों उत्तेजित कर रहा है ?

कंगना और विवादों का नाता नया नहीं है….अब तो कंगना पे मीडिया भी पैनी नज़र बनाये हुए है जब से उन्होंने प्रधामंत्री मोदी, देश की सेना और भारतीय संस्कृति की तारीफ की हैं..मीडिया का एक वर्ग जान बूझ के उनको टारगेट करने लगा है और JNU टाइप वाले तथाकथित लिबरल्स उनको नए नए कारण खोज ट्रोल करते हैं…पर कंगना लगता इनसे ज़यादा इत्तेफाक नहीं रखती और हमेशा वो बोलती और करती हैं जो उनको पसंद आता है !

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