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मुख्यमंत्री जयराम बोले, सामान्य बीपीएल परिवारों की कन्या को भी शगुन योजना के तहत मिलेंगे 31 हजार

हिमाचल सरकार अब सामान्य वर्ग के बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों की बेटियों को भी शादी पर 31000 रुपये शगुन देगी। 6 मार्च को पेश किए गए बजट में सरकार ने 50 करोड़ रुपये की नई ‘शगुन’ योजना का एलान किया था। इस योजना में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीपीएल परिवारों की बेटियों को ही शामिल किया गया था।

विपक्ष के विरोध के बाद सरकार अब नई व्यवस्था को बजट में शामिल करेगी।
सत्र के 11वें दिन सोमवार को बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि गरीब तो गरीब हैं, चाहे वे किसी भी वर्ग के हों। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के बीपीएल परिवारों की बेटियों को भी शगुन योजना में शामिल किया जाएगा।

इलेक्ट्रिक मीटरों के दामों की होगी जांच : जयराम
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा है कि इलेक्ट्रिक मीटरों के दामों में भिन्नता की जांच करवाई जाएगी। इसके लिए ऊर्जा मंत्री को कहा गया है, दोषियों पर कार्रवाई होगी। कोरोना काल में राजस्थान में -6.6, पंजाब में -6.4 जबकि हिमाचल प्रदेश की विकास दर – 6.2 फीसदी घटी है। पंजाब के संशोधित वेतनमान की रिपोर्ट का अध्ययन कर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।

सीएम जयराम ठाकुर ने बजट पर चर्चा के जवाब में कहा कि प्रदेश में करुणामूलक के साढ़े चार हजार मामले लंबित हैं। इन पर विचार कर रही है। पुलिस भर्ती अनुबंध पर नहीं, बल्कि नियमित आधार पर होती है। पुलिस के कुछ मामले लंबित जरूर हैं। महिलाओं को मातृत्व अवकाश 135 से बढ़ाकर 180 दिन किया है। कर्मचारियों और अधिकारियों को 1140 करोड़ की वृद्धि दी है। छह हजार एनपीएस कर्मियों को 110 करोड़ के लाभ दिए हैं। एचआरटीसी को 258 करोड़ दिए हैं।

सीएम ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए तीन साल में वर्तमान सरकार से अधिक कर्जा लिया है। कांग्रेस के समय कर्ज वृद्धि 67 फीसदी थी। वर्तमान में 26 फीसदी है। तीन साल में कांग्रेस सरकार ने नाबार्ड में 1276 करोड़ स्वीकृत कराए। जबकि वर्तमान सरकार ने 2221 करोड़ मंजूर कराए। स्वास्थ्य में पूर्व सरकार ने 5508 करोड़ और वर्तमान सरकार ने 8245 करोड़ खर्चे, लोनिवि में पहले 9193 करोड़ और अब 1265 करोड़, शिक्षा में पहले 17856 करोड़ और अब 23449 करोड़ व्यय किए हैं।

ग्रामीण विकास में पहले 44321 करोड़ और अब 5463 करोड़,  कृषि में पहले 1412 करोड़ और अब 1878 करोड़, बागवानी में 971 करोड़ पहले और अब 1464 करोड़ जबकि जल शक्ति विभाग में पहले 6544 करोड़ और अब सरकार ने 8788 करोड़ व्यय किए हैं। पूर्व सरकार की तीसरे साल योजना आकार 4800 करोड़ का था जबकि वर्तमान सरकार के तीसरे साल में योजना आकार 7900 करोड़ का रहा। पहले विधायक निधि खर्चा 35.72 करोड़ था जबकि अब यह 80.70 करोड़ रहा। वर्ष 20 22 तक जीएसटी की क्षतिपूर्ति का मामला केंद्र और 15 वें वित्तायोग से उठाया है। ठाकुर ने कहा कि हिमकेयर में 331 करोड़ खर्चे हैं। गृहिणी योजना में 2.91 लाख को मुफ्त गैस दी गई है।

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