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विज्ञापन हर सरकार देती है लेकिन जनता का पैसा विज्ञापनों में पानी की तरह जिस मुख्यमंत्री ने बहाया है वो नाम है केजरीवाल, आंकड़े देख चौंक जाएंगे आप

ये बोलते थे हम राजनीती बदलने आये हैं लेकिन ये तो खुद ऐसा बदले की बड़ों बड़ों को पीछे छोड़ दिया। केजरीवाल सरकार की सबसे बड़ी ताकत उनका काम नहीं सिर्फ विज्ञापन हैं किसी भी राज्य के न्यूज़ पोर्टल उठाकर देख लें केजरीवाल सरकार के विज्ञापन आपको नजर आएंगे। दूसरों को उपदेश देकर राजनीती में आये थे लेकिन आज दूसरे मुख्यमंत्रियों को कोसों दूर छोड़ चुके हैं केजरीवाल जिस तरह विज्ञापनों पर पैसा बहाया जा रहा है उसको लेकर हर कोई हैरान हैं।

किसी राज्य के मुख्यमंत्री ने विज्ञापनों पर इतना ध्यान नहीं दिया होगा जितना आम आदमी पार्टी दे रही है। दिल्ली में लगातार आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है। पहली सरकार का गठन 28 दिसम्बर 2013 को हुआ जो मात्र 49 दिन तक चली और उसके बाद 15 फ़रवरी 2014 को कांग्रेस के समर्थन से दूसीर बार अरविंद केजरीवाल ने सरकार बनाई यह सरकार भी 363 दिन ही चल पाई।

साल 2012-13 में आम आदमी पार्टी ने 10.11 करोड़ रुपए सरकार के विज्ञापन पर खर्च किया। यह आंकड़ा 2013-14 में बढ़कर 11.22 करोड़ हो गया। इसके बाद 2014-15 में चुनाव से ठीक पहले तक 7.37 करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च किए गए। वहीं 2015-16 में सरकार के गठन के साथ ही पार्टी की तरफ से सरकारी कामकाज के प्रचार प्रसार के लिए किए गए विज्ञापन पर 62.03 करोड़ रुपए खर्च किए गए। साल 2016-17 में अरविंद केजरीवाल की सरकार ने विज्ञापन पर 66.80 करोड़ रुपए खर्च किए तो वहीं 2017-18 में यह आंकड़ा लगभग दोगुना हो चुका था इस वित्त वर्ष में अरविंद केजरीवाल सरकार ने विज्ञापन पर 120.30 करोड़ रुपए खर्च कर दिए।

इसके बाद 2018-19 में इस आंकड़े में कमी आई और सरकारी विज्ञापन पर केजरीवाल सरकार ने 46.90 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। इसके बाद 2020 का चुनावी साल आया। ऐसे में 2019-20 के लिए विज्ञापन पर अरविंद केजरीवाल सरकार ने कई गुना ज्यादा रकम खर्च कर डाली। इस वित्त वर्ष में केजरीवाल सरकार के द्वारा विज्ञापन पर केवल 201.20 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। 2020 के मार्च महीन में कोरोना ने देश में दस्तक दी तब भी अरविंद केजरीवाल की सरकार विज्ञापन पर रोक नहीं लगा पाई।

अभी तक 2020-21 के आंकड़े सही तरीके से मौजूद नहीं हैं। लेकिन जिस तरह से कोरोना काल में अरविंद केजरीवाल सरकार ने विज्ञापन के जरिए अपनी उपलब्धियों को जाहिर करने की कोशिश की उससे साफ पता चलता है कि यह आंकड़ा साल 2019-20 के मुकाबले कई गुणा बड़ा होगा। हालांकि 2020-21 के लिए जनवरी तक का अनुमानित आंकड़ा 177.18 करोड़ रुपए का बताया जा रहा है।

ऐसे में अरविंद केजरीवाल सरकार के इस सात साल के कार्यकाल को देखें तो आपको पता चलेगा कि विकास से ज्यादा सरकार का फोकस विज्ञापन पर है। अरविंद केजरीवाल सरकार विज्ञापन के जरिए एक छोटे से प्रदेश की जनता के दिल में जगह बनाने की कोशिश लगातार करती रहती है। आपको बता दें कि लगभग 2 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश की सरकार ने 500 करोड़ से ज्यादा की रकम केवल अपने काम के विज्ञापन के लिए खर्च कर दिए।

इतनी रकम के जरिए दिल्ली की जनता को विकास का एक और मानक तैयार करके दिया जा सकता था। प्रदेश की जनता के टैक्स के पैसे को इतनी बड़ी मात्रा में सरकार के कामकाज के प्रचार प्रसार के लिए खर्च कर दिया गया। लेकिन दिल्ली के बाहर इतने चुनाव आप पार्टी लड़ चुकी है लेकिन उसके हाथ सफलता नहीं लग पाई है इसके पीछे की वजह अधिकतर यही बताई जाती रही है कि सिर्फ विज्ञापनों तक ही इस सरकार का विकास सिमित है.

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