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स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनता को लाभान्वित करने के लिए सीएम जयराम ठाकुर के द्वारा उठाये गए कदम प्रदेश के लोगों को दे रहा हैं बड़ा लाभ

सत्ता संभालने के बाद से ही हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश के लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए काफी काम शुरू किये हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र के अच्छी योजना शुरू करके जयराम ठाकुर ने प्रदेश के लोगों को काफी लाभ पहुँचाया है। बात सिर्फ योजना शुरू करने तक ही नहीं रुकी है जयराम ठाकुर ने लोगों को प्रदेश में ही अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ देने के लिए बहुत बड़े निर्णायक कदम प्रदेश में उठायें हैं।

गरीब व्यक्ति हार्टअटैक और ब्रेन हेमरेज के समय कई बार पैसे की कमी से उस समय लगने वाला इंजेक्शन नहीं लगवा पाता था क्योंकि उसकी कीमत 40 हजार से ज्यादा है इसलिए जयराम सरकार ने उस इंजेक्शन को फ्री किया हुआ है। इस इंजेक्शन के फ्री उपलब्ध होने की वजह से कई मरीजों की आपात स्थिति में जान बची है। यही नहीं किडनी ट्रांसप्लांट ले लिए प्रदेश से बहार जाना पड़ता था लेकिन प्रदेश के इतिहास में पहली बार आईजीएमसी शिमला में किडनी का ट्रांसप्लांट किया गया।

यही नहीं जयराम सरकार ने कैंसर, पार्किंसन, पैरालिसिस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, थैलेसीमिया, हिमोफिलिया, गुर्दे की विफलता आदि गंभीर बीमारियों से जूझने वाले रोगियों को सहारा योजना के तहत 3 हजार की राशि हर महीने देती है। जिसके तहत गंभीर बीमारी से पीड़ित बिस्तर पर पड़े हुए मरीजों को आर्थिक मदद मिल रही है।सहारा योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वरदान साबित हो रही है। यही नहीं केंद्र सरकार द्वारा देश के नागरिकों को अच्छे स्वास्थ्य सेवाएं एवं स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करवाने की दृष्टि से आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई। इसके कार्यान्वयन में राज्य सरकार ने प्रदेश में जमीनी स्तर पर प्राथमिकता से कार्य किया। इस योजना के अंतर्गत राज्य में लाभार्थी परिवार को पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करवाया जा रहा है। हिमाचल सरकार ने इस योजना के तहत अब तक चार लाख सत्रह हजार (4,17,000) परिवारों को पंजीकृत किया है तथा बानबे हजार नौ सौ बावन (92,952) मरीजों का उपचार किया जा चुका है। इस पर एक सौ तीन करोड़ (103,0000000/-) की राशि व्यय की गई है। जो लोग इसके तहत लाभ नहीं ले पाए उनके लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमकेयर योजना को शुरू किया है।

आयुष्मान भारत से शेष बचे परिवारों को पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा सुविधा प्रदान करने के लिए राज्य में हिमकेयर योजना आरंभ की गई है। इस योजना के अंतर्गत अब तक पांच लाख तेरह हजार (5,13,000) से अधिक परिवारों को पंजीकृत किया जा चुका है और एक लाख बहत्तर हज़ार (1,72,000) मरीजों को लाभ दिया जा चुका है जिस पर एक सौ साठ करोड़ छियासठ लाख (160,66,00000/-) रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। आईजीएमसी शिमला में हमेशा से एक अच्छी,विश्वसनीय 24 घंटे चलने वाली प्रयोगशाला की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। राज्य के प्रत्येक कोने से इस संस्थान में आने वाले रोगियों के प्रबंधन और चिकित्सकों की जरूरतों और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, सभी डाइयग्नॉस्टिक क्षमताओं वाले अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना अब यहां की गयी है। प्रयोगशाला सभी जैव रासायनिक (आरएफटी, एलएफटी, लिपिड, इलेक्ट्रोलाइट्स, एडीए आदि) हेमेटोलॉजी (एचबी, सीबीसी), सीएसएफ परीक्षा और हेमोस्टेसिस पैरामीटर (पीटी / आईएनआर) के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स, रक्त गैस विश्लेषण जैसे पोईंट ओफ़ केयर प्रदान करने में सक्षम है।

यह प्रयोगशाला सभी प्रकार के रोगियों और उनके इलाज करने वाले डॉक्टरों के मार्गदर्शन के लिए 24×7 अनेकों प्रकार के मार्कर टेस्ट जैसे सीआरपी, फेरिटिन, डी डाईमर करने में सक्षम है। कोविड के Truenaat टेस्ट की सुविधा भी इस लैब में है।इस लैब की स्थापना के बाद अब आईजीएमसी ने लिथियम परीक्षण प्रदान करने की क्षमता हासिल कर ली है यह सुविधा IGMC शिमला में पहले नहीं थी। पहले लोगों को तीन से चार दिनो तक लिथीयम की रिपोर्ट का इंतज़ार करना पड़ता था। लैब में लगाए गये सभी उपकरण पूर्ण पारदर्शिता अपनाते हुए GeM के माध्यम से ख़रीदें गये हैं।सभी उपकरण अन्तर्राष्ट्रीय मानकों पर आधारित हैं जैसे USFDA,EU,CE. लैब में जो जाँच मशीन स्थापित की गयी है वह अपनी तरह की प्रदेश में पहली मशीन है। इस मशीन का नाम AUTO ANYLYSER XL1000/ स्वचालित विश्लेषक XL-1000, यह मशीन एक साथ एक घण्टे की अवधि में एक हज़ार चालीस सैम्पल की जाँच करने में सक्षम है।

यही नहीं वर्तमान प्रदेश सरकार ने राज्य के निर्धन परिवारों के लिए अलग से मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष स्थापित किया है। जो परिवार किसी बीमारी से ग्रसित हो और धन के अभाव से अपना उपचार न करवा पा रहा हो, उन्हें इस कोष के तहत राहत राशि प्रदान की जाती है। अब तक इस कोष के अंतर्गत सात सौ छियानबे (796) मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। इसके लिए नौ करोड़ उनतालीस लाख (9,39,00000/-) रुपये की राशि व्यय की गई है।

कोरोना के खिलाफ भी मजबूती से जयराम ठाकुर ने प्रदेश में हैल्थ इंफ्रास्टक्स्चर को मजबूत करने का कार्य किया है। राज्य सरकार ने कोरोना महामारी की तीसरी लहर आने से पहले प्रभावी तरीके से इससे निपटने के लिए तीव्र गति से प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तारीकरण कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया है। राज्य सरकार ने प्रदेश के लोगों के बहुमूल्य जीवन को बचाने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में बिस्तर क्षमता में बढ़ौतरी करने के साथ-साथ अन्य विभिन्न प्रकार की आवश्यक सुविधाओं को जुटा कर इस वैश्विक कोरोना महामारी को नियंत्रित करने का प्रयास किया हैं। जिसके सार्थक परिणाम सामने आए है।

तीन माह में बिस्तर क्षमता को 837.3 प्रतिशत बढ़ाया। मार्च, 2021 में प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में कोविड मरीजों केे उपचार के लिए केवल 440 बिस्तर उपलब्ध थे, लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर के आने के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में बिस्तर क्षमता को तीव्र गति से 837.3 प्रतिशत तक बढ़ाया है। तीन माह में कोविड मरीजों के उपचार के लिए 5 जून, 2021 तक 3684 बिस्तरों की संख्या बढ़ा कर बिस्तर क्षमता को 4124 तक पहुंचाया है।

राज्य में कोरोना महामारी की पहली लहर के नियंत्रित होने और राज्य में स्थिति सामान्य होने पर राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के अनेक स्वास्थ्य संस्थानों को कोविड समर्पित स्वास्थ्य केंद्र की सूची से बाहर कर सामान्य अस्पताल के रूप में आम लोगों के लिए खोल दिया गया था। राज्य सरकार द्वारा गत तीन माह में विभिन्न जिलों में कोविड मरीजों के लिए बिस्तर क्षमता में जिला बिलासपुर में 135, चंबा में 185, हमीरपुर में 156, कांगड़ा में 759, किन्नौर में 26, कुल्लू में 74, लाहौल स्पीति में 38, मंडी में 512, शिमला में 748, सिरमौर में 435, सोलन में 488, ऊना में 128 बिस्तरों की संख्या बढ़ाई गई है। उपचार के लिए 47 नए स्वास्थ्य संस्थान किए चिन्हित। कोविड की दूसरी लहर से निपटने के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या में भी 427.3 प्रतिशत तक की बढ़ौतरी की है। एक मार्च, 2021 को प्रदेश में कोविड समर्पित स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या केवल मात्र 11 थी। राज्य सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में कोविड मरीजों के लिए नए स्वास्थ्य संस्थान चिन्हित कर इनकी संख्या को 58 तक पहुंचाया है। सरकार द्वारा 47 नए स्वास्थ्य संस्थान मरीजों की सुविधा के लिए चिन्हित किए है।

डी-टाइप सिलेंडरों में 42.6 प्रतिशत की बढ़ौतरी। जयराम सरकार ने कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में डी-टाइप आक्सीजन सिलेंडरों में 42.6 प्रतिशत तक की बढ़ौतरी की है। मार्च-2021 में प्रदेश में डी-टाइप आक्सीजन सिलेंडरों की संख्या 5537 थी जिसमें राज्य सरकार ने 2361 की बढ़ौतरी की है। वर्तमान में प्रदेश में डी-टाइप आक्सीजन सिलेंडरों की संख्या 7898 है। बिलासपुर में 227, चंबा में 350, हमीरपुर में 155, कांगड़ा में 1776, किन्नौर में 101, कुल्लू में 348, लाहौल स्पीति में 55, मंडी में 1420 शिमला में 1663, सिरमौर में 481, सोलन में 995 व ऊना में 327 बी-टाइप सिलेंडर उपलब्ध है। बी-टाइप सिलेंडरों में 23 प्रतिशत की बढ़ौतरी। राज्य सरकार ने बी-टाईप आक्सीजन सिलेंडरों की संख्या में भी 23 प्रतिशत तक की बढ़ौतरी की है। मार्च, 2021 में राज्य में जहां कुल 1916 बी-टाईप आक्सीजन सिलेंडर थे वहीं जून, 2021 में इनकी संख्या बढ़कर 2356 हो गई है राज्य सरकार द्वारा बी- टाईप सिलेंडरों की संख्या को 440 तक बढ़ाया गया है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों बिलासपुर में 90, चंबा में 70, हमीरपुर में 70, कांगड़ा में 601, किन्नौर में 59, कुल्लू में 30, लाहौल स्पीति में 77, मंडी में 124 शिमला में 845, सिरमौर में 93, सोलन में 234 व ऊना में 63 बी-टाइप सिलेंडर उपलब्ध है।

रेमडेसिविर स्टाॅक में 143 प्रतिशत की वृद्धि। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने व मरीजों के उपचार में उपयोग होने वाले रेमडेसिविर इंजैक्शन में भी राज्य सरकार ने 143 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। अप्रैल माह में प्रदेश में जहां रेमडेसिविर का स्टाॅक 3882 था वहीं वर्तमान में राज्य के पास 9446 रेमडेसिविर उपलब्ध है। गत दो माह के दौरान राज्य सरकार ने रेमडेसिविर के स्टाॅक में 5564 की बढ़ौतरी की है। वर्तमान में बिलासपुर जिला में 117, चंबा में 312, हमीरपुर में 190, कांगड़ा में 3062, कुल्लू में 49, लाहौल स्पीति में 22, मंडी में 2292 शिमला में 1860, सिरमौर में 770, सोलन में 515 व ऊना में 257 रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध है। राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए समय-समय पर उठाए गए कदमों के परिणाम स्वरूप ही राज्य सरकार कोरोना महामारी को नियंत्रित करने और प्रदेश के लाखों लोगों के बहुमूल्य जीवन को बचाने में सफल रही है।

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